बरेका की ऐतिहासिक उपलब्धि, 2500वें विद्युत रेल इंजन का किया निर्माण

 बरेका की ऐतिहासिक उपलब्धि, 2500वें विद्युत रेल इंजन का किया निर्माण

बरेका की ऐतिहासिक उपलब्धि, 2500वें विद्युत रेल इंजन का किया निर्माण

बनारस, 20 जुलाई (वार्ता) बनारस रेल इंजन कारखाने ने 2017 में दो विद्युत इंजन के निर्माण के साथ अपना सफर शुरू किया था और अब इसने 2500वें इंजन बनाने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है।

कंपनी तकनीकी उत्कृष्टता और नवाचार की रोज नई ऊंचाइयों को छू रही है। बरेका ने अब तक 10,822 लोकोमोटिव बनाये हैं, जिनमें 7498 डीज़ल इंजन और 2500 विद्युत इंजन शामिल है। इनमें से 641 गैर-रेलवे ग्राहकों के लिए, 174 निर्यातित डीज़ल इंजन, 01 ड्यूल ट्रैक्शन इंजन, 08 कन्वर्जन इंजन शामिल हैं।

बरेका ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में योगदान देते हुए वित्तीय वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 472 इलेक्ट्रिक लोको का निर्माण किया है। यह बरेका की उत्पादन क्षमता, दृढ़ इच्छाशक्ति और तकनीकी सामर्थ्य को दर्शाता है।

बरेका द्वारा निर्मित 2500वां विद्युत इंजन आधुनिक तकनीक से लैस डब्ल्यूएपी-7 श्रेणी का है, जिसमें 6000 एचपी क्षमता, वातानुकूलित कैब, रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग और 140 किलोमीटर/घंटा की रफ्तार की क्षमता है। यह इंजन दक्षिण- पश्चिम रेलवे के कृष्णराजपुरम शेड को भेजा जा रहा है।

बरेका के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने 2500 वें लोकोमोटिव का लोकार्पण मीडिया की टीम की मौजूदगी में किया । कार्यक्रम की शुरुआत 'हॉल ऑफ फेम' में एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण से हुई, जिसमें बरेका के निर्माण इतिहास, निर्यात उपलब्धियों, स्वदेशीकरण, हरित ऊर्जा प्रयासों एवं तकनीकी नवाचारों को रेखांकित किया गया। इसके बाद रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (सूचना एवं प्रचार) दिलीप कुमार ने मीडिया टीम के साथ बरेका का निरीक्षण किया।

इस दौरान प्रमुख मुख्य विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी परिषद् सदस्य और काफी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे।

बरेका को हाल ही में मोज़ाम्बिक रेलवे से 10 आधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का ऑर्डर मिला है, जिनमें से दो इंजन जून में भेजे जा चुके हैं। शेष आठ इंजनों की आपूर्ति दिसंबर 2025 तक की जाएगी। बरेका मोज़ाम्बिक, तंजानिया, वियतनाम, म्यांमार, माली, अंगोला, बंगलादेश, श्रीलंका, मलेशिया, नेपाल और सूडान डीजल इंजन की आपूर्ति करता है।

गौरतलब है कि भारत के प्रथम राष्‍ट्रपति डॉ.राजेन्‍द्र प्रसाद ने अप्रैल 1956 में इस कारखाने का शिलान्‍यास किया था। वहीं, अगस्त 1961 में डीजल-विद्युत रेल इंजन निर्माण लिए एल्को-अमेरिका के सहयोग से 'डीजल रेल इंजन कारखाने' की स्थापना हुई। जनवरी 1964 में प्रथम रेल इंजन का निर्माण कर राष्ट्र को समर्पित किया गया। जनवरी 1976 में इसका निर्यात बाजार में प्रवेश हुआ और प्रथम रेल इंजन तंजानिया को निर्यात किया गया। इसके बाद दिसम्बर 1977 में प्रथम डीजल जनित सेट कमीशन किया गया। अक्टूबर 1995 में अत्याधुनिक माइक्रोप्रोसेसर नियंत्रित, एसी-डीजल इलेक्टिक रेल इंजनों के निर्माण के लिए अमेरिका की जनरल माटर्स से समझौते किया गया। इसके बाद कंपनी ने फरवरी 1997 में अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ) 9002 प्रमाण पत्र प्राप्त किया।

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