वाणी आधारित एआई के मामले में नेतृत्व के लिए तैयार है भारत : एस. कृष्णन
नयी दिल्ली, 25 जुलाई (वार्ता) इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि देश में वाणी आधारित एआई संचार तेजी से बढ़ रहा है और भारत इस मामले में नेतृत्व के लिए तैयार है।भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) द्वारा 'बहुभाषी इंटरनेट - भाषा प्रौद्योगिकी के माध्यम से विकसित भारत का निर्माण' विषय पर आयोजित 'भाषांतर' सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री कृष्णन ने कहा कि एआई संचार के लिए जिन चीजों की जरूरत होती है, भारत के पास उनमें से पहुंच पहले से मौजूद है। एक अरब लोगों के पास स्मार्टफोन है। हम लोगों को उनकी अपनी भाषा में पहुँच प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ''इसमें ध्वनि आधारित संचार की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है और इस मामले में भारत दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।''
उन्होंने बताया कि इंडिया एआई मिशन के जरिये सरकार भाषिनी और अनुवादिनी जैसे मॉडलों को समर्थन दे रही है। लोग इनका इस्तेमाल भी कर रहे हैं। जिस तरह से लोग अपनी भाषा में आसानी से संवाद करने में सक्षम हैं, यह अपने-आप में एक क्रांति है। भारत दुनिया के लिए एक उदाहरण है क्योंकि 140 करोड़ से अधिक की आबादी और भाषा तथा बोली की विविधता वाले देश में यदि यह किया जा सकता है तो दुनिया के दूसरे देशों में भी यह किया जा सकता है।
यूनिसेफ इंडिया के आईटी एवं डिजिटल नवाचार प्रमुख गिबसन रिउंगू ने कहा कि समता का मतलब है आपकी अपनी भाषा में संचार। हर 10 में से नौ इंटरनेट उपयोगकर्ता चाहते हैं कि वे अपनी भाषा में इसका इस्तेमाल कर सकें।
उन्होंने कहा कि समता का अर्थ यह भी है कि हर भाषा में उपलब्ध सामग्री की गुणवत्ता एक सी हो। कोई भी मॉडल विकसित करने के क्रम में ही उसे बच्चों के अनुकूल बनाना चाहिये। हमें लो-बैटरी और ऑफलाइन के लिए भी मॉडल डिजाइन करना चाहिये। एक बच्चा जब अपनी मातृभाषा में बात करता है, अपनी मातृभाषा में सवाल पूछता है तो वह भविष्य का नेतृत्वकर्ता बनता है।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए गूगल के अनुसंधान एवं एआई सहयोगी हर्ष ढांड ने कहा कि निजी क्षेत्र प्रौद्योगिकी विकास और शुरुआती पूँजी मुहैया कराने में अहम भूमिका निभा रहा है। सरकार को डाटा को उन्मुक्त करना चाहिये। उन्होंने कहा कि प्रसार भारती के पास देश की विविध भाषाओं में बेशुमार डाटा का संग्रह है जिसका इस्तेमाल एआई को समृद्ध बनाने में किया जा सकता है। उन्होंने अनुरोध किया कि सरकार एक केंद्रीकृत व्यवस्था कायम कर सकती है ताकि एक ही विषय पर हो रहे अनुसंधानों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

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