इस बार पांच ब्लॉकों और एक शहरी क्षेत्र में चलेगा एमडीए, तैयारियां शुरू
इस बार पांच ब्लॉकों और एक शहरी क्षेत्र में चलेगा एमडीए, तैयारियां शुरू
गोरखपुर। फाइलेरिया से बचाव के प्रति वर्ष चलने वाला सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान इस बार जिले के सिर्फ पांच ब्लॉकों और एक शहरी क्षेत्र में ही चलाया जाएगा। बाकी ब्लॉक और शहरी क्षेत्र फाइलेरिया से मुक्ति की ओर अग्रसर हैं। ऐसे में राज्य स्तर से प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुसार फिलहाल पूरे जिले में अभियान चलाने की आवश्यकता नहीं है। जिन इलाकों में इस बार एमडीए अभियान चलना है वहां कार्यक्रम से जुड़े ब्लॉक और यूनिट स्तरीय अधिकारियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को बृहस्पतिवार को प्रशिक्षित किया गया। यह लोग इकाई स्तर पर स्वास्थ्य टीम को प्रशिक्षित करेंगे। यही टीमें दस अगस्त से घर घर जाकर लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाएंगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ राजेश झा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इस बार शत प्रतिशत परिणाम आधारित अभियान चलाने पर जोर दिया।
सीएमओ डॉ राजेश झा ने कहा कि जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह के कुशल नेतृत्व में इससे पूर्व में चले एमडीए अभियानों का परिणाम है कि पांच ग्रामीण ब्लॉकों को छोड़ कर बाकी के ग्रामीण क्षेत्र फाइलेरिया से मुक्ति की ओर अग्रसर हैं। शहर में भी सिर्फ एक क्षेत्र शेष रह गया है, जहां इस बार अभियान चलाना पड़ रहा है। लोगों को हाथीपांव की दिव्यांगता और हाइड्रोसील व महिलाओं को स्तन में सूजन के कारक फाइलेरिया से बचाने के लिए निर्धारित मात्रा में स्वास्थ्य टीम अपने सामने ही दवा खिलाएं। पूरा अभियान माइक्रो प्लान के हिसाब से चलना चाहिए। लॉजिस्टिक की कोई भी कमी नहीं रहनी चाहिए। लोगों तक यह स्पष्ट संदेश पहुंचना चाहिए कि एक बार फाइलेरिया होने के बाद उसका सम्पूर्ण उपचार संभव नहीं है, इसलिए स्वस्थ लोगों को यह दवा अवश्य खानी चाहिए ताकि उन्हें फाइलेरिया (हाथीपांव) न हो।
जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि इस बार दस अगस्त से बासगांव, गोला, पाली, पिपरौली और उरुवा ब्लॉक में, जबकि नथमलपुर शहरी क्षेत्र में एमडीए अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान करीब दो लाख बाईस हजार दो सौ इक्यावन घरों में रहने वाले दस लाख सत्ताईस लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य है। क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फाइलेरिया का संक्रमण होता है और इस बीमारी का लक्षण दिखने में पांच से पंद्रह वर्ष तक का समय लग जाता है। अगर लक्षण आने से पहले ही पांच साल तक लगातार साल में एक बार फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन कर लिया जाए तो इस बीमारी से बच सकते हैं।
इस अवसर पर डिप्टी सीएमओ डॉ राजेश कुमार, सभी फाइलेरिया व मलेरिया इंस्पेक्टर्स तथा कार्यक्रम से जुड़े अन्य सहयोगी संगठन भी प्रशिक्षण में शामिल हुए।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें