उप्र भाजपा प्रमुख की रेस: ब्राह्मण-ओबीसी समीकरण में उलझी पार्टी

लखनऊ, 26 जुलाई (वार्ता) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई में नए अध्यक्ष को लेकर मंथन जारी है। संगठन के सूत्रों की मानें तो छह नामों की एक सूची राष्ट्रीय नेतृत्व को भेजी गई है उसमें दो ब्राह्मण, दो पिछड़े समुदाय से और दो दलित समुदाय से हैं। इन नामों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। जल्द ही शीर्ष नेतृत्व द्वारा इसका ऐलान भी कर दिया जाएगा।

दरअसल, भारत के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में अगले साल पंचायत चुनाव होने हैं। वहीं 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और राज्य इकाई प्रमुख का चुनाव इन बातों को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा।
राज्य में लोकसभा चुनाव में मिली हार को पलटकर लखनऊ में लगातार तीसरी बार जीत हासिल करना चाहेगी। भाजपा ने 37 में से 25 से ज़्यादा संगठनात्मक इकाइयों में राज्य प्रमुखों का चयन कर लिया है। अपने अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की भी तैयारी कर रही है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि सुझाए गए नामों में पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और बस्ती के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी (दोनों ब्राह्मण), उत्तर प्रदेश के मौजूदा मंत्री धर्मपाल सिंह और मौजूदा केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा (दोनों ओबीसी), और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामशंकर कठेरिया और मौजूदा एमएलसी विद्यासागर सोनकर (दोनों दलित) शामिल हैं।
भाजपा नेता ने कहा “ संगठन ने अपनी ओर से केंद्रीय नेतृत्व को उपयुक्त नाम सुझाए हैं जिन पर उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद के लिए विचार किया जा सकता है और नेतृत्व सक्रिय रूप से उनका मूल्यांकन कर रहा है। अगले दो हफ़्तों में और संभवतः उससे भी पहले कोई फैसला होने की संभावना है।”
अपनी साफ-सुथरी छवि और शैक्षणिक योग्यता के लिए जाने जाने वाले ब्राह्मण नेता शर्मा को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और शीर्ष नेतृत्व का विश्वास प्राप्त है। द्विवेदी भी ब्राह्मण हैं और युवा तथा संसदीय अनुभव लेकर आते हैं। वे बस्ती से सांसद और पार्टी में राष्ट्रीय सचिव रह चुके हैं।
धर्मपाल सिंह और बीएल वर्मा दोनों ही प्रभावशाली लोध समुदाय से हैं। उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में वरिष्ठ मंत्री सिंह को विधायी और मंत्री पद का दशकों का अनुभव है। वर्तमान में केंद्रीय राज्य मंत्री वर्मा को एक अनुशासित और साधारण संगठनकर्ता के रूप में देखा जाता है, जिनका आरएसएस से गहरा जुड़ाव है। संगठन के भीतर उन्हें विश्वास प्राप्त है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष कठेरिया हिंदुत्व और दलित पहचान के अपने आक्रामक रुख के लिए जाने जाते हैं। वहीं एमएलसी सोनकर एक साधारण लेकिन वफादार पार्टी कार्यकर्ता हैं जिनका पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रभाव है।
हालांकि इन छह नामों के अतिरिक्त बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य और स्वतंत्र देव सिंह का नाम भी तेजी से उछला है। इसमें केशव मौर्य ज्यादा चर्चा में हैं। श्री मौर्य के करीबियों की माने तो शीर्ष नेतृत्व की तरफ से उनको सकारात्मक संदेश मिला है जिससे वो पिछले कुछ दिनों से काफी उत्साहित दिख रहे हैं।
उत्तर प्रदेश भाजपा में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश त्यागी ने कहा, नया प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा यह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को तय करना है। जब समय आएगा तो नेतृत्व की तरफ से इसकी घोषणा भी कर दी जाएगी।

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