वर्चुअली सिखाया मॉडल सीआई वीएचएसएनडी और डेंगू प्रबंधन का गुर
प्रथम सत्र में मॉडल सीआई वीएचएसएनडी से जुड़े कर्मियों को बताया गया कि विभाग का लक्ष्य मॉडल सीआई वीएचएसएनडी और मॉडल सीआई यूएचएसएनडी के जरिये समुदाय को शत प्रतिशत गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। जिले में इससे पहले करीब दो सौ मॉडल सीआई वीएचएसएनडी/यूएचएसएनडी विकसित किए गए जिनके बेहतर परिणाम सामने आए हैं। इसे देखते हुए 210 नये सत्र विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इसका उद्देश्य सत्र स्थल पर शत प्रतिशत प्रसव पूर्व जांच, नियमित टीकाकरण, परिवार नियोजन सेवाएं, अति कुपोषित बच्चों का प्रबंधन, आभा आईडी सृजन, आयुष्मान कार्ड सृजन, टीबी मुक्त अभियान, गैर संचारी रोगों की स्क्रिनिंग और लाभार्थी केंद्रित परामर्श उपलब्ध करना है।
दोपहर बाद ई-आरोग्य पाठशाला के दौरान सभी सीएचओ को संचारी रोगों के बेहतर प्रबंधन का तरीका बताया गया। उन्हें सतर्क किया गया कि अगर किसी भी प्रकार के बुखार या बीमारी के मामले उनके क्षेत्र में अप्रत्याशित तरीके से बढ़ रहे हैं तो तत्काल ब्लॉक मुख्यालय को सूचना देना है। संचारी रोगों के आउटब्रेक की स्थिति में रोगियों की त्वरित जांच और उपचार की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। इसमें सीएचओ को स्थानीय टीम का नेतृत्व करना है और ब्लॉक स्तरीय टीम का पूरा सहयोग करना है। सीएचओ की भूमिका संचारी रोगों जैसे मलेरिया, डेंगू और इंसेफेलाइटिस आदि के बारे में लोगों का संवेदीकरण करने में भी है। साथ ही जिन परिवारों में इन बीमारियों के मरीज हैं उन्हें खासतौर पर जागरूक करना है। साथ ही साथ संचारी रोगों का समुचित सर्विलांस करना है ताकि उनका प्रसार रोका जा सके।
सीएमओ डॉ राजेश झा ने ई-आरोग्य पाठशाला के जरिये सीएचओ से अपील की कि वह समुदाय को मानसूनी बारिश के बाद खासतौर से जागरूक करें। उन्हें बताएं कि कहीं भी साफ पानी का जमाव नहीं होने देना है। डेंगू का मच्छर एक चम्मच साफ पानी में भी पनप सकता है। कूलर, गमले, फ्रीज ट्रे और घर में रखे खाली पात्र आदि स्थानों पर साफ पानी इकट्ठा न होने दें। साथ ही अगर किसी को भी बुखार होता है तो नजदीकी सरकारी अस्पताल पर ही चिकित्सक की निगरानी में इलाज कराएं। तेज बुखार के रोगियों की सरकारी अस्पताल के जरिये इंसेफेलाइटिस, डेंगू और मलेरिया आदि संचारी बीमारियों की भी निःशुल्क जांच कराई जाती है। इसके जरिये इन बीमारियों के मरीजों की निगरानी संभव है। अगर समय रहते संचारी रोगों का सही तरीके से प्रबंधन हो जाए तो जटिलताओं से बचाव होता है। समुदाय में साफ-सफाई के संदेश के साथ ‘‘बुखार में देरी, पड़ेगी भारी’’ का सबसे महत्वपूर्ण संदेश मजबूती के साथ प्रचारित प्रसारित करना होगा।
डॉ झा ने बताया कि ई-आरोग्य पाठशाला के आयोजन में डीसीपीएम रिपुंजय पांडेय और सहयोगी संस्था इको इंडिया के प्रतिनिधिगण ने विशेष सहयोग किया। पाठशाला के दौरान संचारी रोगों की रिपोर्टिंग, त्वरित हस्तक्षेप, सरकार के समर्पित पोर्टल्स, डिजीज सर्विलांस मैकेनिज्म और संचारी रोगों के विभिन्न तकनीकी पक्ष के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

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