दिव्यांगजनों के यूडीआईडी कार्ड के लिए गठित बोर्ड में निजी डॉक्टर होंगे शामिल
लखनऊ 23 जुलाई (वार्ता) उत्तर प्रदेश में दिव्यांगजनों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के साथ ही उनके उन्नयन को लेकर विशिष्ट अधिगम एवं बौद्धिक दिव्यांगजनों के चिन्हांकन, मूल्यांकन, दिव्यांगता प्रमाणपत्र एवं यूनिक दिव्यांगजन पहचान पत्र (यूडीआईडी कार्ड) जारी किए जाने के लिये एक अभूतपूर्व और ठोस अभियान की शुरुआत की गई है। अभियान को मूर्त रूप देने के लिए दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर दिव्यांगता प्रमाणपत्रों के लंबित मामलों की समीक्षा करने तथा इसकी प्रक्रिया को तेज़ करने का आग्रह किया है। पत्र में विभाग ने 12 मार्च 2024 को जारी अधिसूचना का हवाला देते हुए यह भी सुझाव दिया है कि जनपदों में दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाने के लिये विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए निजी चिकित्सकों को भी प्रमाणपत्र पैनल में शामिल किया जाए। इस कार्य मे मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ डॉक्टरों का भी सहयोग लिया जाए।इसके अतिरिक्त विभाग ने मेडिकल बोर्डों के पुनर्गठन, दिव्यांगता के अनुरूप विशेषज्ञों की नियुक्ति और प्रमाणपत्र दिवसों की संख्या बढ़ाने का भी सुझाव दिया है ताकि सभी लंबित मामलों का शीघ्र समाधान हो सके।
राज्य आयुक्त दिव्यांगजन उत्तर प्रदेश प्रोफेसर हिमांशु शेखर झा ने बताया कि यह पहल विशेष रूप से उन दिव्यांगजनों के लिए है जो डिस्लेक्सिया, डिस्केलकुलिया, डिसग्राफिया, डिस्प्रेक्सिया जैसे विशिष्ट अधिगम अक्षमताओं से प्रभावित हैं।
उन्होने बताया कि इन लोगों की बौद्धिक क्षमता सामान्य अथवा सामान्य से अधिक होती है और वे समाज में लगातार योगदान देते रहे हैं मगर अब तक इन दिव्यांगजनों के अधिकारों की प्राप्ति के लिए कोई विशेष राज्यव्यापी अभियान नहीं चलाया गया था। प्रो. झा ने बताया कि विशिष्ट अधिगम दिव्यांगता को 2016 में लागू दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम में विधिवत मान्यता मिली है, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर अब तक उनके लिए प्रमाणपत्र निर्माण, पहचान, और योजनाओं का लाभ सीमित रहा। इस कमी को दूर करने के लिए अब प्रदेशव्यापी अभियान की शुरुआत की गई है, जिसमें चिन्हांकन से लेकर प्रमाणपत्र वितरण तक की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाएगी।

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