नवजात शिशु और बाल स्वास्थ्य की गुणवत्तापूर्ण निगरानी से घट जाएगी बाल मृत्यु दर
गोरखपुर। जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने कहा है कि अगर समुदाय स्तर पर नवजात शिशु और बाल स्वास्थ्य की गुणवत्तापूर्ण निगरानी का जाए तो बाल मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। वह मंगलवार को आयोजित ई-आरोग्य पाठशाला के दौरान वर्चुअली जुड़े जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) को सम्बोधित कर रहे थे। इस मंगलवार आयोजित ई-आरोग्य पाठशाला में यूनिसेफ संस्था से जुड़े विषय विशेषज्ञ बृजेंद्र चौबे ने सभी सीएचओ को नवजात शिशु और बाल स्वास्थ्य देखभाल के बारे में टिप्स दिए। पाठशाला के जरिए इस बात पर भी जोर दिया गया कि समुदाय में होने वाली प्रत्येक नवजात और बाल मृत्यु की शत प्रतिशत रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए ताकि डेथ एनॉलिसिस कर भविष्य में होने वाली मृत्यु को रोकने के लिए प्रभावी रणनीति पर काम किया जा सके।
विषय विशेषज्ञ बृजेंद्र चौबे ने सीएचओ को बताया कि जन्म के समय ही कम वजन वाले बच्चों की अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद समुदाय स्तर पर आशा कार्यकर्ता द्वारा नियमित निगरानी आवश्यक है। यह निगरानी सही तरीके से हो रही है या नहीं, इसे सभी सीएचओ को सुनिश्चित करना होगा। ऐसे बच्चों के मामलों में सीएचओ की जवाबदेही अधिक हो जाती है। इन बच्चों के अभिभावकों को संदेश दें कि किसी भी प्रकार से बच्चे को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत हो तो तुरंत 102 नंबर एम्बुलेंस की मदद से नजदीकी अस्पताल पहुंचें। संस्थागत प्रसव की स्थिति में डिस्चार्ज होने के अगले दिन चौबीस घंटे के भीतर नवजात शिशु का फॉलो अप अवश्य होना चाहिए।
श्री चौबे ने बताया कि अभिभावकों को यह संदेश देना भी बेहद जरूरी है कि जन्म के बाद यथाशीघ्र मां का दूध ही बच्चे को पिलाना है। छह माह तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध पिलाना चाहिए। छह माह के बाद बच्चे को मां के दूध के साथ-साथ समुचित मात्रा में पूरक आहार भी देना है। इससे बच्चे का तेजी से विकास संभव हो सकेगा।
पाठशाला में कुपोषित बच्चों के प्रबंधन के बारे में विशेष तौर पर चर्चा की गई। सीएचओ को बताया गया कि बिना जटिलता वाले कुपोषित बच्चों का प्रबंधन आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर ही किया जाए, जबकि जटिलता वाले कुपोषित बच्चों को चिकित्सक के पास संदर्भित किया जाए। आवश्यकतानुसार चिकित्सक की सलाह पर जटिलता वाले कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाना चाहिए। ई-आरोग्य पाठशाला में कंगारू मदर केयर, एचबीएनसी, एचबीवाईसी, प्रथम एक हजार दिन और ई कवच पर रिपोर्टिंग आदि के बारे में विस्तार से चर्चा की गई।
सीएमओ डॉ राजेश झा ने बताया कि इको इंडिया संस्था के सहयोग से प्रत्येक मंगलवार को स्वास्थ्य से जुड़े किसी न किसी अहम मुद्दे पर अपराह्न दो से तीन बजे के बीच ई-आरोग्य पाठशाला का आयोजन किया रहा है। इसका उद्देश्य सीएचओ का क्षमता संवर्धन करना है ताकि समुदाय को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। इस अवसर पर डीसीपीएम रिपुंजय पांडेय भी मौजूद रहे।

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