श्री हरिशयनी एकादशी व्रत आज,चातुर्मास आरम्भ
गोरखपुर(दुर्गेश मिश्र)। भारतीय विद्वत् महासंघ के महामंत्री पं. बृजेश पाण्डेय ज्योतिषाचार्य ने बताया की आज 6 जुलाई दिन रविवार को श्री हरिशयनी एकादशी व्रत है। एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। पुराणों के अनुसार प्रत्येक माह मे दो एकादशी व्रत आते हैं इस तरह से वर्ष में कुल 24 एकादशी व्रत पड़ते हैं। श्री हरिशयनी एकादशी व्रत के दिन व्रत रखने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
व्रती महिलाएं इस दिन पूजन के दौरान 'सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत सुप्तं भवेदिदम। विबुद्धे त्वयि बुध्येत जगत सर्वं चराचरम।' मंत्र का जाप करें। इस दिन तुलसी की पत्तियों को तोड़ना वर्जित माना गया है क्योंकि ऐसा करना अशुभ हो सकता है। एकादशी व्रत की पूजा में तुलसी दल का उपयोग करने के लिए एक दिन पूर्व ही तुलसी जी की पत्तियां तोड़कर रख लेनी चाहिए। व्रती महिलाओं को तुलसी की पूजा करते समय बाल बांधकर रखना चाहिए और काले रंग के वस्त्र नहीं पहनने चाहिए। एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है। ऐसी मान्यता है की इस दिन चावल खाने से व्यक्ति अगले जन्म में सरीसृप का रूप धारण करता है।
पंडित बृजेश पाण्डेय ने यह भी बताया की श्री हरिशयानी एकादशी से ही भगवान श्री विष्णु चार माह के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा के लिए चले जाते हैं, इसलिए इसे चातुर्मास के नाम से भी जाना जाता है। इस चार मास के अवधी मे शुभ और मांगलिक कार्य शादी-विवाह,उपनयन संस्कार तथा अन्य मंगल कार्य वर्जित होता है। चातुर्मास के पश्चात पुनः भगवान विष्णु देव उत्थयनी एकादशी से निद्रा त्यागकर लोक कल्याण करते है। धार्मिक मान्यता अनुसार देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी जी की पूजा और व्रत करने से साधक को सभी दुखों से छुटकारा मिलता है,साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। मान्यता है कि विष्णु देव, शयन में जाने पर अपना पदभार तब तक भूतभावन भोलेनाथ शिव जी को सौप देते हैं। तब तक श्रावण मास आरंभ हो जाता है और भोलेनाथ पृथ्वी लोक आकर अपने भक्तों की देखभाल करते है,इसीलिए सभी जनमानस विशेष कर शिव आराधना मे लीन हो जाते हैं।

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