सर्वाधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन करवा कर पूरे प्रदेश में गोरखपुर अव्वल
सर्वाधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन करवा कर पूरे प्रदेश में गोरखपुर अव्वल
गोरखपुर। जिले में राष्ट्रीय दृष्टिविहीनता एवं दृष्टिदोष नियंत्रण कार्यक्रम के तहत चलाए गए राष्ट्रीय नेत्र ज्योति अभियान के दौरान गोरखपुर ने पूरे प्रदेश में शानदार प्रदर्शन किया है। इसके तहत जिले ने मोतियाबिंद के सर्वाधिक मरीजों का ऑपरेशन करवा कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। साथ ही स्कूलों में आई-स्क्रिनिंग कर चश्मा वितरण के मामले में भी गोरखपुर पूरे राज्य में दूसरे स्थान पर है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने इसके लिए जिले के सभी सर्जन, स्वयंसेवी संस्थाओं, नेत्र परीक्षकों और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम टीम को बधाई दी है। उन्होंने बताया कि यह रैकिंग मार्च दो हजार पचीस तक की उपलब्धि पर आधारित है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने बताया कि राष्ट्रीय दृष्टिविहीनता एवं दृष्टिदोष नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की आंखों में मोतियाबिंद का निःशुल्क ऑपरेशन सरकारी अस्पतालों और गैर सरकारी संगठनों द्वारा संचालित जिले से सम्बद्ध नौ अस्पतालों में निःशुल्क कराया जा रहा है। साथ ही एक से उन्नीस वर्ष तक के बच्चों और पैंतालीस वर्ष से अधिक आयु के लोगों के आंखों की जांच कर निःशुल्क चश्मे भी वितरित किए जाते हैं। इनके अलावा कार्निया बैंक, नेत्रदान का प्रचार प्रसार और नेत्र से जुड़े अन्य विकारों का इलाज भी इस कार्यक्रम के तहत किया जा रहा है। इसी क्रम में पिछले वर्ष तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे और कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ अश्विनी चौरसिया की देखरेख में जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि जिले के बेहतर प्रदर्शन में योगदान देने वालों को यथाशीघ्र जिला स्तर पर सम्मानित भी किया जाएगा। गोरखपुर जिले ने गत वर्ष 74708 लोगों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया जो राज्य द्वारा निर्धारित लक्ष्य का एक सौ चौदह दशमलव पांच सात फीसदी है। वहीं स्कूल-आई स्क्रीनिंग कार्यक्रम के तहत जिले में पांच हजार पांच सौ छप्पन स्कूली बच्चों को निःशुल्क चश्मे वितरित किए गए। यह तय लक्ष्य के सापेक्ष एक सौ चौबीस दशमलव नौ नौ फीसदी की उपलब्धि है। गोरखपुर, पैंतालिस वर्ष से अधिक आयु के दृष्टिदोष वाले लोगों के आंखों की जांच कर निःशुल्क चश्मा देने के मामले में सातवें स्थान पर रहा है। जिले ने ऐसे दो हजार सात सौ सतहत्तर लोगों को जांच के बाद निःशुल्क चश्मा देकर एक सौ चौबीस दशमलव नौ दो प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है।
अंधता से बचाव के लिए चलता है कार्यक्रम
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि राष्ट्रीय दृष्टिविहीनता एवं दृष्टिदोष नियंत्रण कार्यक्रम का लक्ष्य वर्ष दो हजार पचीस में अंधता की दर को एक फीसदी से घटा कर शून्य दशमलव तीन फीसदी तक लाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि 62 प्रतिशत अंधता मोतियाबिंद के कारण होती है, जबकि बीस प्रतिशत बच्चों में अंधता दृष्टिदोष के कारण होती है। मोतियाबिंद को समय रहते सर्जरी से ठीक किया जा सकता है, जबकि दृष्टिदोष को सही नंबर के चश्मे से ठीक करके अंधता को नियंत्रित किया जा सकता है।

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