डायरिया नियंत्रण में ओआरएस व जिंक की बड़ी भूमिका : डॉ. दिनेश कुमार
लखनऊ 29 जुलाई (वार्ता) डायरिया रोको अभियान के तहत विश्व ओआरएस दिवस पर स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया (पीएसआई इंडिया) और केनव्यू के सहयोग से मंगलवार को एक स्थानीय होटल में “डायरिया से जीवन सुरक्षा” पर संगोष्ठी आयोजित की गयी।संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. दिनेश कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि डायरिया से किसी भी बच्चे की मौत न होने पाए। डायरिया के नियंत्रण व प्रबंधन में ओआरएस और जिंक की बड़ी भूमिका है, जिसकी उपलब्धता स्वास्थ्य इकाइयों और आशा कार्यकर्ताओं को सुनिश्चित करायी गयी है। इस मौके पर आशा कार्यकर्ताओं, स्टाफ नर्स, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर, एएनएम को प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।
महानिदेशक ने कहा कि डायरिया रोकथाम और प्रबन्धन में समुदाय स्तर पर जागरूकता की भी बहुत जरूरत है, जिसके लिए कई स्वयंसेवी संस्थाएं प्रयासरत हैं। राज्य सरकार द्वारा संचालित डायरिया रोको अभियान में सहयोग के लिए पीएसआई इंडिया और केनव्यू के सहयोग से चलाये जा रहे “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम को उन्होंने सराहा।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश के बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के महाप्रबन्धक डॉ. मिलिंद वर्धन ने कहा कि बच्चों के डायरिया प्रबन्धन में ओआरएस एक किफायती और सर्व सुलभ उपाय है, जो शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण) की समस्या को दूर करने का सबसे कारगर तरीका है। बच्चों में डायरिया से होने वाला निर्जलीकरण ही मृत्यु का कारण बनता है। अपर निदेशक परिवार कल्याण डॉ. शारदा चौधरी ने भी डायरिया प्रबन्धन में ओआरएस की भूमिका पर प्रकाश डाला और जोर दिया कि घर में अगर छोटे बच्चे हैं तो ओआरएस जरूर रखें।
पीएसआई इंडिया के स्टेट लीड अमित कुमार और सीनियर मैनेजर प्रोग्राम अनिल द्विवेदी ने बताया कि पीएसआई इंडिया और केनव्यू प्रदेश के सात जिलों फिरोजाबाद, मुरादाबाद, मथुरा, बदायूं, उन्नाव, गोंडा और श्रावस्ती में “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं। इसके तहत डायरिया से बचाव, कारण, रोकथाम व उपचार से जुड़े संदेशों वाले पोस्टर-बैनर व आडियो/वीडियो से सुसज्जित वाहन इन सात जिलों के गली-मोहल्लों में पहुँच रहे हैं और लोगों को जागरूक बना रहे हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन. बी. सिंह ने कहा कि डायरिया रोको अभियान के दौरान जिस तरह से गतिविधियाँ आयोजित की गयीं, वह सराहनीय हैं। इस तरह का जागरूकता अभियान समुदाय स्तर पर निरंतर बनाए रखना हमारी फ्रंट लाइन वर्कर की बड़ी जिम्मेदारी है। इंडियन एकेडमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स की अध्यक्ष डॉ. शालिनी भसीन ने कहा कि डायरिया नियन्त्रण में निजी क्षेत्र की भी बड़ी भूमिका है।

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