एसजीपीजीआई में लगेगी वायरल हेपेटाइटिस पर मास्टर क्लास
लखनऊ 25 जुलाई (वार्ता) तेजी से बदलती जीवन शैली के बीच आम लोगों को शिकार बना रही बीमारियों को देखते हुए संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) अपने फैकल्टी मेम्बर्स सहित मेडिकोज के लिए शनिवार से मास्टर क्लास संचालित करने जा रहा है।विश्व हेपेटाइटिस दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय मास्टर क्लास के दौरान हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और हेपेटाइटिस ई सहित हेपेटाइटिस के सामान्य कारणों के शीघ्र निदान, रोकथाम और उपचार के बारे में जानकारी दी जायेगी। मास्टर क्लास में शामिल होने के लिए प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रतिभागियों ने मास्टर क्लास के लिए पंजीकरण कराया है और लगभग 200 प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है।
एसजीपीजीआई के हेपेटोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ अमित गोयल के मुताबिक वायरल हेपेटाइटिस भारत में यकृत रोग और यकृत कैंसर का प्रमुख कारण है। इसका पता अक्सर रोग के अंतिम चरण में तब चलता है, जब यकृत रोग पहले ही विकसित हो चुका होता है। रोकथाम और शीघ्र निदान जीवन रक्षक हो सकता है और स्वास्थ्य सेवा एवं सार्वजनिक संसाधनों पर बोझ कम करता है।
वायरल हेपेटाइटिस एक संक्रमण है जो लीवर में सूजन और क्षति का कारण बनता है। सूजन अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। शोधकर्ताओं ने कई अलग-अलग वायरस लिंक की खोज की है जो हेपेटाइटिस का कारण बनते हैं, जिनमें हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई शामिल हैं। कार्यक्रम में हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा सहित वायरल हेपेटाइटिस की जटिलताओं के प्रबंधन पर भी चर्चा होगी। हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा के तहत लिवर कैंसर का सबसे आम रूप है । यह एक आक्रामक (तेज़ी से बढ़ने वाला) कैंसर है जो लिवर सिरोसिस जैसी उन्नत लिवर बीमारी वाले लोगों में सबसे आम है । एचसीसी से पीड़ित लोगों में लिवर की एक ऐसी स्थिति बढ़ती जा रही है जो कभी-कभी सिरोसिस का कारण बनती है, जिसे मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (एमएएसएलडी) कहा जाता है ।शुरुआत में, हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा धीरे-धीरे बढ़ता है। ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी या लिवर ट्रांसप्लांट से एचसीसी का शुरुआती चरणों में इलाज किया जा सकता है। लेकिन ज़्यादातर लोगों को तब तक पता नहीं चलता कि उन्हें यह बीमारी है जब तक कि यह गंभीर न हो जाए और तेज़ी से न फैल जाए। अंततः, यह लिवर फेलियर का कारण बन सकता है । इस स्थिति में, एचसीसी का इलाज करना चिकित्सकों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।
कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के डीन और सीएमएस की उपस्थिति में निदेशक (प्रो.) आर. के. धीमन द्वारा किया जायेगा। इस अवसर पर हेपेटोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर अमित गोयल अन्य वक्ताओं और संकाय सदस्यों के साथ इस आयोजन में शामिल होंगे और युवा चिकित्सकों को शिक्षित करेंगे।

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