गोरखपुर में दर्दनाक हादसा, वन विभाग की 30 फीट लंबी दीवार ने ली जान, पुलिस महकमे में शोक की लहर

गोरखपुर(दुर्गेश मिश्र)। शहर के बीचोंबीच आज़ की सुबह एक ऐसा हादसा हुआ जिसने पूरे पुलिस विभाग, मृतक के परिवार और उनके पैतृक गांव को गहरे शोक में डुबो दिया। कैंट थाना क्षेत्र के सिविल लाइंस स्थित वन विभाग की जर्जर चारदीवारी  सुबह करीब 10 बजे अचानक भरभराकर गिर पड़ी। उस समय वहां से गुजर रहे 47 वर्षीय हेड कॉन्स्टेबल विक्रम प्रसाद यादव इसकी चपेट में आ गए।

चंद ही पलों में सब कुछ बदल गया। एक पल पहले तक पैदल पुलिस लाइन की ओर बढ़ रहे विक्रम प्रसाद, अगले ही पल ईंटों और मलबे के ढेर के नीचे दबे पड़े थे। आसपास मौजूद लोग और वन विभाग के गेट पर तैनात होमगार्ड उनकी ओर दौड़े, हाथों से ईंटें हटाईं, मदद के लिए पुकारा, लेकिन तब तक विक्रम गंभीर रूप से घायल हो चुके थे।

हादसे की विभीषिका

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वन विभाग की यह दीवार करीब 6 फीट ऊंची और 30 फीट लंबी थी, जो बरसों से जर्जर हालत में खड़ी थी। हाल की लगातार तेज़ बारिश ने इसकी नींव और दीवार दोनों को कमजोर कर दिया था। आज़ सुबह जब विक्रम कार्मल स्कूल मोड़ के पास पहुंचे, तभी दीवार भरभराकर गिर पड़ी।

दीवार गिरने की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि आसपास के लोग सहम गए। कार्मल स्कूल में उस वक्त पेरेंट-टीचर मीटिंग चल रही थी, कई अभिभावक अपने बच्चों को लेने और छोड़ने के लिए उसी रास्ते से गुजर रहे थे। कुछ लोग ठीक दीवार के पास अपनी बाइक खड़ी कर इंतजार कर रहे थे। उनकी आंखों के सामने यह दर्दनाक मंजर घटा।

अस्पताल तक की जद्दोजहद

स्थानीय लोग, पुलिस लाइन से आए जवान और वन विभाग के कर्मचारी मिलकर विक्रम को ईंटों के मलबे से बाहर निकालकर तत्काल बीआरडी मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें, साथ ही अत्यधिक रक्तस्राव के कारण कुछ ही देर में उनकी सांसें थम गईं।

एक समर्पित पुलिसकर्मी की कहानी का अंत

मूल रूप से बस्ती जिले के पिकौरा गांधी नगर निवासी विक्रम प्रसाद यादव 1998 में उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती हुए थे। लगभग 27 वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने विभिन्न जिलों में अपनी ईमानदारी और निष्ठा से कार्य किया। वर्तमान में उनकी तैनाती गोरखपुर पुलिस लाइन में थी और वे ADM प्रशासन के गनर के रूप में सेवा दे रहे थे।

उनके परिवार में पत्नी और तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। हादसे की खबर मिलते ही परिजन गहरे सदमे में हैं। गांव में भी शोक की लहर है। ग्रामीणों के अनुसार, विक्रम न केवल एक अनुशासित पुलिसकर्मी थे बल्कि एक मिलनसार और मददगार इंसान भी थे।

दीवार की हालत पर पहले भी उठे थे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग की इस चारदीवारी की हालत लंबे समय से खराब थी। कई जगह दरारें थीं और बारिश के दिनों में दीवार से ईंटें झड़ना आम बात हो गई थी। बरसात के कारण दीवार पूरी तरह गीली हो चुकी थी और किसी भी वक्त गिर सकती थी। अफसोस, इसकी मरम्मत या मजबूतीकरण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

घटना के बाद प्रशासनिक हलचल

हादसे की सूचना मिलते ही कैंट थाना प्रभारी, गोलघर चौकी प्रभारी और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची। करीब आधे घंटे तक सड़क पर यातायात बाधित रहा, जिसे बाद में मलबा हटाकर बहाल किया गया। इस दर्दनाक घटना ने शहर की जर्जर इमारतों और दीवारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस विभाग में शोक और श्रद्धांजलि

हेड कॉन्स्टेबल विक्रम प्रसाद यादव के निधन की खबर फैलते ही पुलिस विभाग के अधिकारी और जवान गमगीन हो गए। उनके साथियों ने उन्हें एक साहसी, अनुशासित और कर्तव्यनिष्ठ जवान बताया। पुलिस लाइन में उनके सम्मान में मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।

यह हादसा सिर्फ एक दीवार गिरने का मामला नहीं, बल्कि शहर में बरसों से उपेक्षित और खतरनाक निर्माणों की अनदेखी का परिणाम है। यदि समय रहते इस दीवार की मरम्मत कर दी जाती, तो शायद एक जवान की जान बच सकती थी।

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