इसरो के वैज्ञानिकों ने बचायी थी एक्सिओम-4 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों की जान
नयी दिल्ली, 21 अगस्त (वार्ता) एक्सिओम स्पेस के एएक्स-4 मिशन की लॉन्चिंग से पहले ऐन वक्त पर यदि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों ने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो यह ''विनाशकारी'' हो सकता था और मिशन में शामिल सभी चार अंतरिक्ष यात्रियों की जान जा सकती थी।
इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और गगनयान मिशन के संभावित क्रू सदस्य प्रशांत नायर के साथ यहां एक प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक्सिओम-4 मिशन अमेरिका के केनेडी स्पेस सेंटर से पहले 11 जून को लॉन्च किया जाना था। इससे ठीक पहले फाल्कन 9 रॉकेट के पहले चरण में ईंधन की टंकी से तरल ऑक्सीजन के रिसाव का पता चला था। एक्सिओम के वैज्ञानिकों को भरोसा था कि यह "छोटा रिसाव'' है और वे रिसाव के साथ ही लॉन्चिंग की योजना बना रहे थे।डॉ. नारायणन ने बताया कि इसरो के वैज्ञानिकों ने उनसे पूछा कि यह रिसाव कहां से हो रहा है और इसकी दर क्या है। लेकिन एक्सिओम के वैज्ञानिकों ने गोपनीयता का हवाला देकर जानकारी देने से मना कर दिया।
इसरो प्रमुख ने कहा, ''40 साल के अनुभव से हमें पता था कि यदि सिर्फ बुलबुले निकल रहे हैं तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन एक हल्की सी भी धार निकलना खतरनाक है।"
उन्होंने कहा कि बार-बार जोर देकर पूछने पर एक्सिओम के वैज्ञानिक जांच करने पर राजी हुये। उन्होंने रिसाव के लोकेशन को खोजकर देखा तो पाया कि ईंधन की टंकी में दरार थी और रिसाव की दर लगातार बढ़ती जा रही थी। इसके बाद उन्होंने 10 जून की लॉन्चिंग टालने का फैसला किया।
डॉ. नारायणन ने कहा कि यदि उस स्थिति में लॉन्चिंग की जाती तो यह वाकई "विनाशकारी" होता। उड़ान भरते ही रॉकेट के परखच्चे उड़ जाते और अंतरिक्ष यात्रियों की जान चली जाती।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार इसरो के वैज्ञानिकों ने मिशन में शामिल चारों अंतरिक्ष यात्रियों की जान बचाई।
इसी मिशन में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जाने वाले वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा कि किसी भी मिशन में सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है, और उन्हें कभी घबराहट नहीं हुई। इस तरह के मिशन में समस्याएं आती रहती हैं, लेकिन उन्हें वैज्ञानिकों पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि तरल ऑक्सीजन के रिसाव के अलावा लॉन्चिंग टालने के दूसरे कारण भी थे।
बाद में समस्या को ठीक कर मिशन 25 जून 2025 को लॉन्च किया गया था और 15 जुलाई को धरती पर वापस लौटा था।

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