इंदिरा गाँधी नक्षत्रशाला, लखनऊ का लोकार्पण

लखनऊ। इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला, लखनऊ का लोकार्पण श्री अनिल कुमार, माननीय मंत्री, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उत्तर प्रदेश द्वारा किया गया। इस अवसर पर माननीय श्री अजीत सिंह पाल, माननीय राज्य मंत्री, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उ.प्र., श्री पंधारी यादव, प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, उ.प्र. एवं महानिदेशक, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उ.प्र. उपस्थित थे।  इस कार्यक्रम में अटल आवासीय विद्यालय, मोहनलालगंज, लखनऊ के 106 विद्यार्थी एवं 9 अध्यापकों ने माननीय मंत्री जी के साथ शो का प्रथम अवलोकन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अपराह्न 3:00 बजे से प्रारंभ हुआ । इस आयोजन में उत्तर प्रदेश एमेच्योर एस्ट्रोनॉमर्स क्लब (UPAAC) के सदस्यों द्वारा भी प्रतिभाग किया । लखनऊ के साथ साथ प्रदेश के सभी जनसामान्य दिनांक 20 अगस्त से ब्रह्मांड के अद्भुत नज़ारे देख सकेंगे । उत्तर प्रदेश का पहला एक्टिव स्टीरियो 8K/3D-2D तारामंडल और भारत का छठा सबसे ज्यादा अत्याधुनिक तारामंडल अब लखनऊ में है । 

अटल आवासीय विद्यालय, मोहनलालगंज, लखनऊ के विद्यार्थियों द्वारा परिषद द्वारा आयोजित निबंध लेखन प्रतियोगिता एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया गया । निबंध प्रतियोगिता में स्वदेश कुमार को प्रथम, शिवांगी यादव को द्वितीय, दीप्ति चौरसिया को तृतीय पुरूस्कार प्रदान किया गया । होनहार गौतम, साक्षी गौतम, विनीत कुमार, अनुपम एवं आदित्य कुमार को सान्तवना पुरूस्कार स्वरुप किताबे एवं प्रमाणपत्र प्रदान किये गए । इसी प्रकार पोस्टर पेंटिंग प्रतियोगिता में संगम को प्रथम, शुभी शर्मा को द्वितीय एवं तेजस्वी चौहान को तृतीय पुरूस्कार स्वरुप  किताबे एवं प्रमाणपत्र प्रदान किये गए तथा प्रिया कुमारी, दीपिका पटेल, सनी कुमार, आरुषी देवी एवं वर्षा राज को सान्तवना पुरूस्कार प्रदान किया गया । इसके अतिरिक्त अटल आवासीय विद्यालय, मोहनलालगंज, लखनऊ के सभी विद्यार्थियों को परिषद की तरफ से उपहार स्वरुप एक ज्यामितीय बॉक्स प्रदान किया गया । उत्तर प्रदेश एमेच्योर एस्ट्रोनॉमर्स क्लब (UPAAC) के सदस्यों द्वारा इन सभी बच्चों की खगोल से सम्बंधित जिज्ञासाएं शांत की गयी । 

श्री अनिल कुमार, माननीय मंत्री, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उत्तर प्रदेश एवं श्री अजीत सिंह पाल, माननीय राज्य मंत्री, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उ.प्र द्वारा विद्यार्थियों द्वारा लगायी हुई प्रदर्शनी का अवलोकन किया एवं विद्यार्थियों से सवाल पूछे ।  और उनके मासूम सवालो के जवाब भी दिए । तत्पश्चात श्री अनिल कुमार, माननीय मंत्री जी द्वारा आधुनिकीकरण के उपरांत इंदिरा गाँधी नक्षत्रशाला लखनऊ के लोकार्पण के शिलापट्ट का अनावरण किया एवं नक्षत्रशाला के सर्वर रूम आदि का भ्रमण किया । इसके उपरांत डोम में आई पेड के माध्यम से नक्षत्रशाला शो का उद्घाटन जन सामान्य हेतु किया ।  

माननीय मंत्री जी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उत्तर प्रदेश ने अपने वक्तव्य में कहा कि, “ इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला, लखनऊ अब केवल एक "शो देखने का केंद्र" नहीं रहेगा, बल्कि यह उत्तर भारत का विज्ञान नवाचार, शिक्षा एवं विज्ञान संचार का प्रमुख हब बनेगा। इसका नया स्वरूप छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों एवं आम जनता – सभी के लिए समान रूप से उपयोगी होगा। आज इन्दिरा गांधी नक्षत्रशाला के लोकार्पण का अवसर हम सभी के लिए अत्यन्त गौरव एवं हर्ष का विषय है। अत्याधुनिक तकनीकी से सुसज्जित नक्षत्रषाला की प्रदेश भर के विद्यार्थियों, जनसामान्य एवं शोधार्थियों को खगोलकी एवं स्पेस सांइस के क्षेत्र में नवीनतम शोध व नवाचार की ओर प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका होगी। नक्षत्रशाला में स्थापित उपकरणों की लागत रूपये 29.65 करोड़ तथा सिविल/इलेक्ट्रिकल एवं ए0सी0 इत्यादि मरम्मत कार्यां की लागत रूपये 11.43 करोड़ है। इस प्रकार नक्षत्रशाला के आधुनिकीकरण में कुल रूपये 41.08 करोड़ का व्यय हुआ हैं। नक्षत्रशाला द्वारा संचालित एस्ट्रोनामी क्लब के माध्यम से टेलीस्कोप के द्वारा विभिन्न खगोलीय घटनाओं एवं ग्रह व नक्षत्रों आदि का अवलोकन कराया जाता है तथा विद्यार्थियों को टेलीस्कोप संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसका नया रूप न केवल छात्रों के लिए बल्कि वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और जनसामान्य के लिए भी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अग्रणाी क्षेत्रों यथा स्पेस साइंस एवं एस्ट्रोनामी की ओर आकर्षित करने एवं नये कीर्तिमान स्थापित करने में अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होगा।”

माननीय मंत्री जी द्वारा यह भी कहा गया कि, “निकट भविष्य में इन्दिरा गांधी नक्षत्रशाला में भूतल पर स्पेस साइंस, खगोल विज्ञान एवं भारत द्वारा प्रक्षेपित चन्द्रयान, मंगलयान, आदित्य एल-1 सोलर मिषन पर आधारित आधुनिकतम विज्ञान मॉडल्स की गैलरी में स्थापना की जायेगी। विद्यार्थियों हेतु सीएसटीयूपी एस्ट्रोयड सर्च कैम्पेन, टेलीस्कोप मेकिंग वर्कशॉप, प्रति वर्ष एस्ट्रोनॉमी कैलेंडर का निर्माण एवं वितरण तथा विभिन्न खगोलीय घटनाओं के अवलोकन हेतु आउटरीच कार्यक्रमों का आयोजन वृहद स्तर पर किया जायेगा।” अंत में उन्होंने कहा कि, “ एक बार पुनः विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी टीम तथा आज उपस्थित प्रतिभागियों एवं विजेता विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देता हूँ। मुझे आशा ही नही अपितु पूर्ण विश्वास है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मा0 मुख्यमंत्री जी के कुषल नेतृत्व में प्रदेश एवं देश के विकास में निरन्तर योगदान देता रहेगा तथा प्रदेश द्वारा लक्षित एक ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। यह नक्षत्रशाला नई शुरूआत की ओर कदम बढ़ाने का एक अवसर है। आप सभी को अपनी ऊर्जा और उत्साह को बनाये रखने की आवश्यकता है जिससे हम आगे ऐसी ही नक्षत्रशालाओं एवं विज्ञान पार्को की स्थापना प्रदेश के प्रत्येक जनपद मे कर सकें।” 

माननीय राज्य मंत्री जी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उत्तर प्रदेश ने अपने वक्तव्य में कहा कि आधुनिकतम डिजिटल तकनीक से सुसज्जित इन्दिरा गांधी नक्षत्रशाला के लोकार्पण का अवसर अत्यन्त गौरवपूर्ण एवं समस्त प्रदेषवासियों के लिए हर्ष का विषय है। नवीनतम तकनीक पर आधारित इस नक्षत्रषाला की प्रदेश के विद्यार्थियों, जनसामान्य एवं शोधार्थियों को खगोलकी एवं स्पेस सांइस के क्षेत्र में आकर्षित करने एवं शोध व नवाचार की ओर प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका होगी। प्रदेश में खगोल विज्ञान की लोकप्रियता का सवंर्धन करने, जनमानस में विज्ञान के प्रति जागरुकता एवं अभिरूचि उत्पन्न करने एवं उनकी उत्सुकताओं को दिशा देने हेतु इन्दिरा गाँधी नक्षत्रशाला की स्थापना की गयी है। इस प्रकार नक्षत्रशाला खगोल वैज्ञानिक एवं जनसामान्य हेतु खगोल विज्ञान के मूलभूत सिद्धान्तों की जानकारी देने के लिए उत्तम साधन है। स्पेस साइंस के क्षेत्र में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा चन्द्रयान-3 तथा आदित्य सोलर मिशन का सफल प्रक्षेपण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की अग्रणीय भूमिका को दर्शाता हैं। इन्दिरा गांधी नक्षत्रशाला लखनऊ केवल एक शो देखने का केन्द्र नहीं बल्कि उत्तर भारत का एक वैज्ञानिक नवाचार, शिक्षण और विज्ञान संचार हब के रूप में विकसित किया गया है। नक्षत्रषाला द्वारा संचालित एस्ट्रोनामी क्लब के माध्यम से टेलीस्कोप के द्वारा विभिन्न खगोलीय घटनाओं एवं ग्रह व नक्षत्रों आदि का अवलोकन कराया जाता है तथा विद्यार्थियों को टेलीस्कोप संचालन का प्रषिक्षण दिया जाता है। इसका नया रूप न केवल छात्रों के लिए बल्कि वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और जनसामान्य के लिए भी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अग्रणाी क्षेत्रों यथा स्पेस साइंस एवं एस्ट्रोनामी की ओर आकर्षित करने एवं नये कीर्तिमान स्थापित करने में अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, उ0प्र0 सरकार भी प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रचार-प्रसार तथा नवीनतम क्षेत्रों में आम जनमानस में अभिरूचि उत्पन्न करने, तार्किक क्षमता विकसित करने तथा नई तकनीकों के विकास हेतु निरंतर प्रयासरत है।

श्री पंधारी यादव, प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसार, “यह अत्याधुनिक नक्षत्रशाला दर्शकों को ब्रह्मांड की अद्भुत यात्रा पर ले जाएगी, जहाँ वे चाँद की सतह, क्षुद्रग्रह टक्करों (asteroid impacts) और वास्तविक समय की खगोलीय घटनाओं का सजीव अनुभव कर सकेंगे। यह अत्याधुनिक नक्षत्रशाला विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित है और भारत सरकार की नई शिक्षा नीति के अनुरूप विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा देती है।”

इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला, लखनऊ को वर्ष 2003 से जनसामान्य हेतु संचालित किया जा रहा है। यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश (CST-UP) के अंतर्गत कार्य करता है। नक्षत्रशाला देश के प्रमुख तारामंडलों में से एक है और अब तक लाखों दर्शकों को खगोल विज्ञान से जोड़ चुका है। प्रारंभिक अवस्था में नक्षत्रशाला में जापान की कंपनी GOTO का ऑप्टोमैकेनिकल प्रोजेक्टर स्थापित था, जो केवल स्थिर खगोलीय दृश्य प्रदर्शित कर सकता था। अब नक्षत्रशाला में 2D/3D – 8K डिजिटल फुलडोम प्रोजेक्शन सिस्टम स्थापित किया गया है, जिसे अमेरिका की कंपनी Evans & Sutherland (E&S) द्वारा लगाया गया है। लखनऊ नक्षत्रशाला में नवीनतम नक्षत्रशाला सॉफ्टवेयर स्थापित है। विश्वभर में 700 से अधिक नक्षत्रशालाएँ इस तकनीक का उपयोग कर रही हैं। भारत में पटना, जयपुर, बी.एम. बिड़ला (हैदराबाद), अहमदाबाद, नेहरू तारामंडल (मुंबई), यशवंतराव चव्हाण (नासिक), सूरत साइंस सेंटर एवं स्वामी विवेकानंद (मंगलुरु) में यह प्रणाली कार्यरत है। 

GPU आधारित ग्राफिक्स रेंडरिंग द्वारा ब्रह्मांड का रीयल-टाइम सिमुलेशन संभव है। लखनऊ में 6 सिंक्रोनाइज़्ड डिजिटल प्रोजेक्टर लगाए गए हैं, जो मिलकर एक seamless visual अनुभव प्रदान करते हैं। पूर्व में एल्युमिनियम फाइबर डोम था, जिसमें जोड़ (seams) स्पष्ट दिखाई देते थे। अब 15 मीटर व्यास का सीमलेस डोम (Nano-Seam Technology) स्थापित है। अंदर-बाहर acoustic treatment कर ध्वनि में प्रतिध्वनि (echo), परावर्तन (reflection) या विकृति (distortion) को समाप्त किया गया है। 7.1 सराउंड साउंड सिस्टम द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली ध्वनि का अनुभव मिलता है। इंदिरा  गाँधी नक्षत्रशाला सीधे NASA/EASA कैटलॉग से जुड़ा है। यह विभिन्न वैज्ञानिक संस्थाओं से प्राप्त जियोस्पेशियल डेटा को वास्तविक समय में प्रस्तुत कर सकता है। दर्शक यहाँ 10,000 वर्ष अतीत एवं 10,000 वर्ष भविष्य का आकाश किसी भी स्थान और समय से देख सकते हैं। इसमें थीम आधारित शो एवं रियल-टाइम विज़ुअलाइज़ेशन संभव है। शैक्षिक सामग्री में पृथ्वी विज्ञान, सौरमंडल, आकाशगंगा एवं खगोल विज्ञान की अनेक वास्तविक अनुक्रम (real-time sequences) सम्मिलित हैं। Advanced Terrain Engine द्वारा दर्शक Xbox नियंत्रक से ग्रहों की सतह, पर्वत श्रृंखलाएँ, घाटियाँ एवं बादलों को explore कर सकते हैं। Planetarium Dome-casting की सुविधा से यहाँ से विश्व के अन्य तारामंडलों में लाइव शो प्रसारित किए जा सकते हैं। Active Stereo 3D तकनीक से पूरा गुंबद एक अद्भुत त्रिआयामी (3D) अनुभव प्रदान करता है।

क्रम संख्या विवरण 2 D शो 3 D शो टिकट का प्रकार छूट प्राप्त करने हेतु प्रस्तुत किया जाने वाला प्रपत्र

सामान्य टिकट्स

1 5 वर्ष तक के बच्चों हेतु

(पृथक से सीट नहीं दी जाएगी) ₹ 0.00 ₹ 0.00 - जन्म प्रमाण पत्र

2 सामान्य दर्शकों हेतु ₹100.00 ₹200.00 ऑनलाइन / ऑफलाइन टिकट -

3 दिव्यांगजनों एवं 18 वर्ष तक की आयु के विद्यार्थियों हेतु ₹50.00 ₹100.00 ऑनलाइन / ऑफलाइन टिकट दिव्यांगता प्रमाणपत्र / आधार कार्ड / स्कूल का पहचान पत्र

सामान्य शो में ग्रुप बुकिंग / स्पेशल शो बुकिंग

1. 18 वर्ष तक की आयु के 100 अथवा 100 से ज्यादा विद्यार्थियों हेतु ₹30.00 ₹60.00 ऑनलाइन रसीद  / ऑफलाइन रसीद आधार कार्ड / स्कूल का पहचान पत्र

2. 100 अथवा 100 से ज्यादा दर्शकों हेतु ₹60.00 ₹120.00 ऑनलाइन रसीद  / ऑफलाइन रसीद

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