देश की प्रतिभा को वापस लाने के लिए संरचनात्मक परिवर्तन करें कुलपति : राजनाथ सिंह
लखनऊ 23 अगस्त (वार्ता) अमेरिका से टैरिफ को लेकर चल रही तनातनी के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, डीन से कहा है कि वे अपने यहां संरचनात्मक परिवर्तन कर प्रोत्साहन दें, जिससे दुनिया भर में फैली भारतीय प्रतिभा देश के लिए काम करने के लिये वापस आ जाये।
उन्होंने कहा “ इससे हमारे रिसर्च डेवलपमेंट तथा इनोवेशन इकोसिस्टम को जो बूस्ट मिलेगा, वह कहीं न कहीं हमे और अधिक ऊंचाइयों पर ले जायेगा।”राजनाथ ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा “ हमारी भारतीय प्रतिभा जो विदेशों में काम कर रही है, उसे वहां असुविधा होने पर किसी दूसरे देश मे जाने के बजाय अपने देश मे आये। चुनौतियों से चिंतित होने के बजाय हमे अवसर की ओर देखना चाहिए। जिससे आने वाले वर्षों में हम सब मिलकर भारत को सिर्फ टेक्नोलॉजी का कन्जयूमर नही बल्कि टेक्नोलॉजी क्रियेटर और ग्लोबल लीडर बना सकते हैं।”
उन्होने कहा “ भारतीय अर्थ व्यवस्था की जिस रैपिड रेल के हम सहयात्री हैं, उसके अगले दरवाजे पर उन्नति, समृद्धि और खुशियां हैं। उन्होंने कहा कि यह समय भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ने का है। हमे अपनी यूनिवर्सिटी, आईआईटी, रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैब, कम्पनी और विचारक में एकेडमिक फ्रीडम के अवसर उपलब्ध कराने होने, जिससे यह प्रतिभा भारत मे आकर काम कर सके। ”
केंद्रीय रक्षा मंत्री ने कहा “ अगर आपकी रक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, तो कोई भी शत्रु, कोई भी विरोधी, आपकी समृद्धि पर, आंख उठाकर नहीं देखेगा। उसे टारगेट करने की कोशिश नहीं करेगा। इसलिए मैं पूरी ज़िम्मेदारी के साथ, आप लोगों के सामने कहना चाहूंगा, कि रक्षा पर होने वाला खर्च विकास पर होने वाले खर्च का एक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जब देश की सुरक्षा व्यवस्था पर आंच आती है, तो निश्चित तौर पर देश का विकास पीछे जाता है। देश के संसाधनों को नुकसान पहुंचता है। देश के नागरिकों के जान-माल को नुकसान होता है। इसलिए मेरा मानना यह है, कि रक्षा पर किया खर्च, इस तरह के नुकसान से बचाता है।”
रक्षा मंत्री ने कहा “ हमारे युवा केवल वैज्ञानिक ही न बनें, बल्कि योद्धा वाली मानसिकता भी रखें। जो उनके निजी जीवन में आगे बढ़ने में तो सहायक होगा ही, साथ ही साथ समाज और देश की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक होगा। उन्होंने कहा कि जब हम अपनी आने पीढ़ी को, साइंस, मैथ, एआई, क्वांटम फिजिक्स और स्पेस रिसर्च में आगे बढ़ाते हैं तो यह भी आवश्यक है कि हर नागरिक, हर विद्यार्थी के भीतर राष्ट्र की रक्षा का संकल्प जीवित रहे।”
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