राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के प्रावधानों का पूरा पालन करे राज्य सरकार : उच्च न्यायालय
लखनऊ 01 अगस्त (वार्ता) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने नवजात बच्चों, स्तनपान कराने वाली माताओं (धात्रियों) के स्वास्थ्य की हिफाजत के मामले में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के प्रावधानों का समयबद्ध तरीके से पूरी तरह पालन करे।अदालत ने कहा कि सरकार आंगनवाड़ी केंद्रों से दिए जाने घरेलू राशन और गर्म पके भोजन की आपूर्ति की उपलब्धता 2022 के नियमों के तहत सख्ती से सुनिश्चित करे। यह भी निर्देश दिया कि घरेलू राशन और गर्म पके भोजन की जगह पर सूखा राशन दिए जाने पर रोक लगाई जानी चाहिए।
न्यायाधीश ए आर मसूदी और न्यायाधीश सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने यह फैसला व आदेश शिप्रा देवी व प्रत्यूष कुमार की जनहित याचिकाओं को निस्तारित करके दिया। याचियों ने प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों को आपूर्ति किए जाने वाले पोषाहार की मात्रा व गुणवत्ता समेत इसके वितरण में कथित धांधली का मुद्दा उठाया था। साथ ही नियम - कानून के तहत केंद्रों के संचालन, पोषाहार आपूर्ति व निगरानी करने का आग्रह किया है।
याचियों का कहना था कि प्रदेश में कुल 1,89,140 आंगनवाड़ी केंद्र चल रहे हैं। इनमें 1,78,706 कार्यकर्ता काम कर रहे हैं। 31 अक्तूबर 2024 तक इन केंद्रों से 2 करोड़ 22 लाख 33 हजार 550 लाभार्थी जुड़े हैं। इसके बावजूद, इन केंद्रों से दिए जाने वाले पोषाहार की मात्रा व गुणवत्ता कानूनी प्रावधानों के तहत न होने का आरोप लगाकर याचियों ने इसमें सुधार के निर्देश देने का आग्रह किया था।
कोर्ट ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को वरीयता देना एवं महिलाओं का सशक्तिकरण सरकार का स्वागत योग्य कदम है, लेकिन यह सशक्तिकरण ग्राम पंचायतों की सहभागिता से होना चाहिए। कोर्ट ने राज्य सरकार को पोषाहार वितरण के पोर्टल पोषण ट्रैकर पर सही जानकारी अपलोड होना सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है। साथ ही कहा कि पोर्टल पर कोई कमी नहीं होनी चाहिए और आंगनवाड़ी केंद्रों पर रखे रजिस्टरों में भी जानकारी दर्ज की जाए।

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