फॉरेंसिक विज्ञान के बेहतर इस्तेमाल से अपराधियों को पकड़ने में हुयी सहूलियत: योगी

लखनऊ 18 अगस्त (वार्ता) पुलिस प्रणाली में फॉरेंसिक विज्ञान और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल की तारीफ करते हुये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि वर्ष 2017 से पहले अपराधियों को पकड़ने में सालों लग जाते थे, लेकिन अब 24 से 48 घंटों के भीतर अपराधियों को पकड़ लिया जाता है।

उन्होने कहा कि इस बदलाव की मुख्य वजह टेक्नोलॉजी और फॉरेंसिक विज्ञान का बेहतर उपयोग है। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल चार फॉरेंसिक लैब थीं, जिनकी स्थिति भी ठीक नहीं थी। वही वर्तमान अब तक 12 नई लैब्स तैयार की जा चुकी हैं और छह अन्य निर्माणाधीन हैं। वहीं 75 जिलों में फॉरेंसिक साक्ष्य को एकत्र करने के लिए मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट्स उपलब्ध करवाई जा रही है।
योगी ने कहा कि प्रदेश में साइबर अपराधों से निपटने के लिए सभी 75 जिलों में साइबर थाने की स्थापना की गई है, और 1587 थानों में साइबर हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए हैं। यहां मास्टर ट्रेनर के जरिये मामलों का निस्तारण किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज के तीसरे स्थापना दिवस पर साइबर युद्ध के आयाम, बहुपक्षीय कानूनी ढांचे, फॉरेंसिक और रणनीतिक प्रतिकार विषय पर आयोजित तीन दिवसीय इंटरनेशनल समिट के उद्धाटन के मौके पर उन्होने पद्मश्री डॉ. लालजी सिंह एडवांस्ड डीएनए डायग्नोस्टिक सेंटर, एआई, ड्रोन और रोबोटिक्स लैब, अटल पुस्तकालय का उद्धाटन किया। इसके साथ ही छात्र-छात्राओं को स्मार्ट टैबलेट वितरित किया। इसके अलावा 75 मोबाइल फॉरेंसिक वैन का फ्लैग ऑफ किया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय संस्कृति ने हमेशा ज्ञान के लिए सभी रास्तों को खोलने का समर्थन किया है। भारतीय संस्कृति का मानना है कि समय के साथ अपने आप को विकसित और तैयार करना अनिवार्य है। प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद से हर अपराध में फॉरेंसिक साक्ष्य को अनिवार्य कर दिया गया है। जुलाई 2024 से सभी सात वर्ष से ऊपर के अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य प्राप्त करना अनिवार्य है। वहीं साइबर अपराधों के लिए यूपी पुलिस ने एक मजबूत कदम उठाये हैं।
उन्होने कहा कि साइबर अपराध को रोकने के लिए साइबर मुख्यालय की स्थापना की दिशा में कदम आगे बढ़ाया गया है। महाकुंभ के आयोजन में भी टेक्नोलॉजी का बेहतरीन उपयोग किया गया था, जिसकी सफलता ने इसे एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया। अब उत्तर प्रदेश पुलिस अपनी कार्यशैली में सुधार कर चुकी है और किसी भी अपराधी को कानून से बचने का कोई मौका नहीं मिलता है। यह केवल पुलिस बल की कड़ी मेहनत और स्मार्ट तकनीकी उपायों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश पुलिस बल को आधुनिक प्रौद्योगिकियों के साथ अपने आप को अपडेट करने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम समाज बना सकें। सरकार का यह प्रयास है कि देश की सबसे बड़ी यूपी पुलिस की ताकत को आधुनिक बनाने है, जो लगातार जारी रहेगा। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश पुलिस को आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां हमें गर्व से याद कर सकें।
उन्होंने कहा कि सेमिनार वर्तमान की चुनौतियों से निपटने के लिए समाज को तैयार करेगा और भविष्य में उत्तर प्रदेश पुलिस को और भी बेहतर बनाएगा।
इस अवसर पर डीजीपी राजीव कृष्ण, प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद, प्रमुख सचिव आईटी एंड इलेक्ट्रानिक अनुराग यादव, एडिशनल सेक्रेटरी आईटी भारत सरकार अभिषेक सिंह, एडीजी टेक्निकल नवीन अरोड़ा, उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फारेंसिक साइंसेज के निदेशक जीके गोस्वामी आदि उपस्थित थे।

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