भारत में बढ़ रही सांस्कृतिक पर्यटन के प्रति दिलचस्पी

लखनऊ 29 अगस्त (वार्ता) भारतीय सैलानियो में सांस्कृतिक पर्यटन के प्रति बढ़ती दिलचस्पी सरकार और टूरिस्ट कंपनियों के लिये आकर्षण का केंद्र बनने लगी है।

स्काईस्कैनर की रिपोर्ट में सामने आया है कि 2025 में दस में से आठ भारतीय संस्कृति की खोज में यात्रा करना चाहते हैं। 93 प्रतिशत भारतीयों को यदि विश्वसनीय सांस्कृतिक अनुभव मिलते हैं, तो वो कम मशहूर जगहों की यात्रा करने के लिए तैयार हैं।कोलकाता में दुर्गा पूजा में 53 प्रतिशत, बरसाना की लट्ठमार होली में 51 प्रतिशत और केरला में ओनम में 35 प्रतिशत भारतीय सैलानी शामिल होना चाहते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 82 प्रतिशत भारतीय सैलानी ऐसे स्थानों की यात्रा करना चाहते हैं, जो उन्हें सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करें। युवा पीढ़ी में मिलेनियल्स (84 प्रतिशत) और जेन ज़ी (80 प्रतिशत) की सांस्कृतिक अनुभवों की ओर दिलचस्पी बढ़ रही है। उनका यह जोश और अधिक गहराई की ओर आकर्षित हो रहा है क्योंकि अधिकांश सैलानी सांस्कृतिक पर्यटन को केवल संस्कृति को देखने तक सीमित नहीं मानते हैं। उनके अनुसार उनकी ट्रिप तब सफल होती है, जब वो उसके बारे में ज्ञान प्राप्त करते हैं। 39 प्रतिशत सैलानी अपने सफर को तब सफल मानते हैं, जब वो उस जगह और वहाँ के लोगों के बारे में कुछ नई जानकारी लेकर वापस आते हैं।
इस रिपोर्ट में एक जबरदस्त परिवर्तन भी सामने आया है। 76 प्रतिशत भारतीय सैलानियों ने किसी सांस्कृतिक समारोह में शामिल होने के लिए अपने सफर की योजना में परिवर्तन किया, जिससे प्रदर्शित होता है कि परंपरा और त्योहार अब छुट्टियों के निर्णय में पूरक गतिविधियाँ नहीं, बल्कि मुख्य कारण बन गई हैं। यह सांस्कृतिक जिज्ञासा किसी भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। हर दस में से सात सैलानियों ने कहा कि वो अपने देश में या विदेश में सांस्कृतिक अनुभव लेने के लिए तैयार हैं। भारतीय सैलानी मूलतः विश्वसनीय और दिलचस्प एडवेंचर पसंद करते हैं।
आधे से अधिक भारतीय सैलानी (55 प्रतिशत) ने स्थानीय त्योहारों, मेलों या सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। कोलकाता में दुर्गा पूजा (53 प्रतिशत), बरसाना की लट्ठमार होली (51 प्रतिशत) और केरला में ओनम (35 प्रतिशत) सर्वोच्च सांस्कृतिक अनुभव हैं, जिनमें इस साल भारतीय सैलानी शामिल होने के लिए सबसे ज्यादा उत्सुक हैं। त्योहारों के अलावा, 53 प्रतिशत सैलानी ऐतिहासिक शहरों, जैसे जयपुर और वाराणसी की यात्रा करना चाहते हैं, जबकि 39 प्रतिशत सैलानी यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज़ साईट्स, जैसे आगरा का ताजमहल और कर्नाटक का हंपी देखना चाहते हैं।
स्काईस्कैनर के डेटा में सामने आया कि भारत के सबसे बड़े सांस्कृतिक शहरों में से एक, वाराणसी के लिए की जाने वाली सर्च में पिछले साल के मुकाबले साल 2025 में 76 प्रतिशत वृद्धि हुई है, वहीं अपने त्योहारों एवं परंपराओं, वास्तुकला के वैभव और स्थानीय विरासत के लिए मशहूर केरला (32 प्रतिशत) और राजस्थान (30 प्रतिशत) भी भारत में सांस्कृतिक राजधानियों के रूप में उभरे हैं।
इनके अलावा, सैलानी ऐसे स्थानों की यात्रा करने के लिए उत्सुक हैं, जो भीड़ से अलग हैं और परंपराओं का संरक्षण करते हैं। 93 प्रतिशत सैलानी कम मशहूर स्थानों की यात्रा करना चाहते हैं, जहाँ उन्हें भीड़ से दूर विश्वसनीय परंपराओं का अनुभव लेने का मौका मिले।
नील घोष, स्काईस्कैनर ट्रैवल ट्रेंड्स एंड डेस्टिनेशन एक्सपर्ट ने कहा, ‘‘भारतीय सैलानी केवल मौजमस्ती के लिए छुट्टियाँ मनाने से आगे बढ़ रहे हैं। वो और अधिक गहरे अनुभव चाहते हैं, जिससे एक नई श्रेणी का जन्म हुआ है। यह श्रेणी है संस्कृति के प्रति उत्सुक सैलानियों की, जो ज्ञान, संपर्क और संतुष्टि की खोज में यात्रा करने निकलते हैं।

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