काशी की सड़कों तक पहुंची गंगा, छत और गलियों में हो रहा दाह संस्कार

वाराणसी, 4 अगस्त (वार्ता) वाराणसी में गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। अस्सी घाट, सामने घाट, शीतला घाट और दशाश्वमेध घाट से गंगा का पानी अब सड़कों की ओर बढ़ रहा है। मणिकर्णिका घाट पर छत पर और हरिश्चंद्र श्मशान घाट पर बाढ़ के कारण गलियों में शवदाह किया जा रहा है। अंतिम संस्कार के लिए दो से तीन घंटे इंतजार करना पड़ रहा है।

केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को गंगा का जलस्तर 72.03 मीटर दर्ज किया गया। गंगा का जलस्तर एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर, खतरे का बिंदु 71.26 मीटर और अधिकतम जलस्तर 73.90 मीटर है।
मणिकर्णिका घाट पर शवदाह के लिए बलिया से आए सोहन कुशवाहा ने बताया कि उन्हें ढाई घंटे इंतजार करना पड़ा। गंगा के बढ़ते जलस्तर ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शवयात्री मुन्ना पाल ने बताया कि शवों की कतार लग रही है और गलियों में भी पानी प्रवेश कर चुका है।
बाढ़ के कारण 32 से अधिक गांवों में 1,470 किसान और 24 वार्ड/मोहल्लों के 5,550 से अधिक लोग प्रभावित हैं। 600 से ज्यादा परिवार बाढ़ राहत शिविरों में रह रहे हैं, जबकि 577 परिवार अन्य सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में सलारपुर, नक्खीघाट, ढेलवरिया, सरैया, हुकुलगंज, दनियालपुर, सारनाथ, नगवां, अस्सी, सामने घाट, मारुति नगर, सिकरौल, पैगंबरपुर, कोनिया, सराय मोहना, कपिलधारा, बघवा नाला और डोमरी शामिल हैं। जिले में 46 बाढ़ राहत शिविर सक्रिय हैं।
पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने बताया कि गंगा और वरुणा नदी में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए विशेष पुलिस बल को नावों पर तैनात किया गया है। घाटों पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है और एनडीआरएफ की टीमें बाढ़ प्रभावित इलाकों में सक्रिय हैं।
मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने बताया कि राहत शिविरों में रह रहे लोगों को सभी आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गश्त और विशेष निगरानी के लिए कहा गया है।

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