फाइलेरिया के सम्पूर्ण उन्मूलन के लिए बचाव की दवा का सामूहिक सेवन जरूरी-सीएमओ

गोरखपुर। जनपद धीरे धीरे फाइलेरिया उन्मूलन की ओर है। यही वजह है कि इस बार सिर्फ पांच ब्लॉकों और एक नगरीय क्षेत्र में सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान दस अगस्त से चलाया जाएगा । इस अभियान से दौरान स्वास्थ्य टीम घर घर जाकर अपने सामने फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाएंगी। जिले में फाइलेरिया के सम्पूर्ण उन्मूलन के लिए बचाव की दवा का सामूहिक सेवन जरूरी है। यह बातें गोरखपुर के सीएमओ डॉ राजेश झा ने शनिवार को कहीं। वह एमडीए अभियान संबंधी होटल विवेक में आयोजित मीडिया कार्यशाला को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे। कार्यशाला का आयोजन स्वयंसेवी संस्था सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के सहयोग से किया गया। इस दौरान एम्स गोरखपुर से आए कम्युनिटी मेडिसिन डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अनिल कोपेकर ने कहा कि सामूहिक दवा सेवन के जरिए ही संक्रमण की चेन तोड़ी जा सकेगी। इसलिए सभी का दवा सेवन करना आवश्यक है।

सीएमओ डॉ झा ने बताया कि इस बार बांसगांव, गोला, पाली, पिपरौली और उरुवा ब्लॉक में अभियान चलाया जाएगा। साथ ही शहरी क्षेत्र के नथमलपुर वार्ड में भी अभियान चलेगा। अभियान में करीब दस लाख लोगों को दवा खिलाई जाएगी। दवा का सेवन खाली पेट नहीं करना है। सभी लोग स्वास्थ्य विभाग की टीम के सामने ही दवा खाएं। दो साल से कम उम्र के बच्चे, अति गंभीर बीमार लोग और गर्भवती को इस दवा का सेवन नहीं करना है। जिन लोगों के भीतर पहले से माइक्रोफाइलेरिया मौजूद होते हैं उन्हें दवा सेवन के बाद कभी कभी उल्टी, मितली, चक्कर आने जैसे लक्षण आने लगते हैं जिससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह अपने आप ठीक हो जाता है।

एम्स गोरखपुर से आए डॉ अनिल कोपेकर ने कहा कि अच्छी बात यह है कि हमारे पास फाइलेरिया से बचाव के लिए दवा उपलब्ध है। इस दवा को लोग सामूहिक तौर पर खाएंगे तो इस बीमारी का संक्रमण रुक जाएगा। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि फाइलेरिया के संक्रमण के बाद लक्षण जल्दी प्रकट नहीं होते हैं। इसलिए इससे संक्रमित व्यक्ति समाज में संक्रमण का कारण बनता है, लेकिन अगर सामूहिक दवा सेवन किया जाए तो संक्रमण को रोका जा सकता है। इस दिशा में एमडीए की महत्वपूर्ण भूमिका है।

इस अवसर पर जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ बीके सुमन ने कार्यशाला की महत्ता पर प्रकाश डाला और कहा कि अभियान को सफल बनाने में मीडिया की अहम भूमिका है। इस दौरान जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने अभियान के बारे में पीपीटी के जरिए विस्तार से प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया, जिसे आम बोलचाल में "हाथीपाँव" कहा जाता है, एक परजीवी जनित रोग है जो संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। इसके दुष्परिणाम वर्षों बाद प्रकट होते हैं और यह शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्तर पर व्यक्ति को कमजोर कर देता है। यह बीमारी न हो इसीलिए अभियान चला कर बचाव की दवा खिलाई जा रही है। इसके लिए 1077 टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों का 197 सुपरवाइजर पर्यवेक्षण करेंगे।

कार्यशाला के दौरान खुले सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें मीडिया के प्रतिनिधियों के सवालों के जवाब दिये गये। इस अवसर पर एसीएमओ डॉ एके चौधरी, आकाशवाणी गोरखपुर के समाचार सम्पादक प्रेम चन्द्र गुप्ता, डिप्टी सीएमओ डॉ अनिल सिंह, डॉ राजेश कुमार, डॉ अश्वनी चौरसिया, डीएचईआईओ केएन बरनवाल, एएमओ प्रभात रंजन सिंह, डीपीएम पंकज आनंद, वेक्टर बोर्न डिजीज कंसल्टेंट सिद्धेश्वरी सिंह प्रमुख तौर पर मौजूद रहीं। आभार ज्ञापन सीफार संस्था की नेशनल प्रोजेक्ट लीड रंजना द्विवेदी ने किया। कार्यशाला में पाथ और पीसीआई संस्था के प्रतिनिधियों ने भी प्रतिभाग किया।


दवा का सेवन क्यों आवश्यक है?

• दवा मुफ्त, सुरक्षित और अत्यंत प्रभावी है।

• संक्रमण की कड़ी को तोड़ने में मदद करती है।

• लक्षण प्रकट होने से पहले ही रोकथाम संभव है।

• दवा सेवन से समुदाय में संक्रमण फैलाव रुकता है।

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