भाजपा ने कानपुर देहात के तीन नेताओं को थमाया कारण बताओ नोटिस
लखनऊ, 21 अगस्त (वार्ता) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कानपुर देहात जिले के एक पूर्व सांसद समेत तीन वरिष्ठ नेताओं को सोशल मीडिया पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप में ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है।
पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी और कानपुर देहात के पूर्व जिला अध्यक्ष मनोज शुक्ला और राजेश तिवारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। पार्टी आलाकमान द्वारा जारी पत्रों में कहा गया है कि उनके कृत्य पार्टी की विचारधारा के विपरीत हैं और गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आते हैं।पार्टी ने इन नेताओं से सात दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है और चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश महासचिव गोविंद नारायण शुक्ला द्वारा भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि इन नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बयानों से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है।
तीनों नेताओं को सात दिनों के भीतर प्रदेश कार्यालय में उपस्थित होकर अपना जवाब देने का निर्देश दिया गया है।सोमवार को पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज शुक्ला और राजेश तिवारी समेत अन्य भाजपा नेताओं ने महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला और उनके पति व पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
उन्होंने दंपत्ति पर 22 आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद ज़्यादातर भाजपाई ब्राह्मण नेता थे। उन्होंने दावा किया कि अनिल शुक्ला ब्राह्मणों के बड़े नेता बनने की कोशिश कर रहे हैं और भाजपा कार्यकर्ताओं को जाति के आधार पर बांट रहे हैं। उन्होंने उन पर खनन माफिया को संरक्षण देने और दबाव बनाकर चंदा वसूलने का भी आरोप लगाया।
इससे पहले, प्रतिभा शुक्ला और उनके पति अनिल शुक्ला ने अकबरपुर के भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले पर कई आरोप लगाए थे। 25 जुलाई को वे अकबरपुर कोतवाली में छह घंटे तक धरने पर बैठे रहे। भोले ने कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले नेता सांसद के करीबी माने जाते हैं।

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