संघर्ष और जीत की कहानी बन चुका है पूजा का सफर

प्रयागराज 14 अगस्त (वार्ता) एक मजबूत और जुझारू चेहरा मानी जाने वाली कौशांबी जिले के चायल सीट की विधायक पूजा पाल का राजनीतिक सफर व्यक्तिगत त्रासदी से शुरू होकर संघर्ष और जीत की कहानी बन गया है।

समाजवादी पार्टी (सपा) से गुरुवार को निष्कासित की गयी विधायक पूजा पाल की परवरिश एक साधारण परिवार में हुयी और शुरुआती जीवन में उन्हे आर्थिक तंगी झेलनी पड़ी। उनका विवाह 2005 में बसपा विधायक राजू पाल से हुआ, लेकिन विवाह के मात्र नौ दिन बाद ही राजू पाल की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी । इस घटना ने पूजा को राजनीति में आने की रास्ता मिला, ताकि वह अपने पति के हत्यारों को सजा दिला सकें और जनता की आवाज़ बन सकें।
राजू पाल की हत्या के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार बनाया, लेकिन उस वक्त वह चुनाव हार गईं। हार के बावजूद पूजा ने हिम्मत नहीं हारी और 2007 के विधानसभा चुनाव में उसी सीट से जीत दर्ज कर विधायक बनीं। 2012 में भी उन्होंने जीत हासिल की और लगातार दो बार प्रयागराज पश्चिम सीट से विधायक बनी। इस दौरान उन्होंने महिलाओं के अधिकार, शिक्षा और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
2017 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और वे तीसरे स्थान पर रहीं। इसके बाद, एक विवादित वीडियो के सामने आने और पार्टी अनुशासन को लेकर मतभेद के चलते बसपा ने उन्हें निष्कासित कर दिया। 2019 में उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थामा। सपा नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया और 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कौशांबी जिले की चायल सीट से प्रत्याशी बनाया। यहां उन्होंने जीत दर्ज की और एक बार फिर विधानसभा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। पूजा पाल का राजनीतिक सफर हमेशा चर्चा में रहा है। एक ओर वह अपने पति के हत्या कांड से जुड़े मामलों में न्याय के लिए लड़ती रहीं, तो दूसरी ओर पार्टी बदलने और नए राजनीतिक समीकरण समझने में भी सक्रिय रहीं। उनकी छवि एक ऐसी महिला नेता की है, जिसने निजी दर्द को संघर्ष में बदला और राजनीतिक मंच पर मजबूती से खड़ी रहीं।आज पूजा पाल प्रयागराज और आस-पास के क्षेत्रों में एक पहचान बन चुकी हैं जहां उन्हें समर्थक एक संघर्षशील नेता के रूप में देखते हैं, वहीं राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी उनकी बढ़ती लोकप्रियता से सतर्क रहते हैं। उनका सफर बताता है कि राजनीति में जज्बा और धैर्य, दोनों का होना जरूरी है।

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