'भारत' तक पहुंच बनाने के लिए स्वदेशी एलएलएम की तलाश में कंपनियां

नयी दिल्ली, 17 अगस्त (वार्ता) प्रौद्योगिकी और ऐप आधारित सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियां अब देश के अंदरूनी हिस्सों यानी 'भारत' तक पहुंच बनाने के लिए स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) की तलाश में हैं और वैश्विक कंपनियों के साथ घरेलू कंपनियों से भी समझौते कर रही हैं।

देश के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाके के लोग ऐप का इस्तेमाल करते समय या इंटरनेट पर प्रश्न पूछते समय अपनी मातृभाषा में ज्यादा सहज महसूस करते हैं। इसके अलावा, यदि वे हिंदी या अंग्रेजी बोलते भी हैं तो उसका अंदाज देशी होता है जिससे विदेशी एलएलएम के लिए उनकी बात को सही ढंग से समझ पाना आसान नहीं होता। यही कारण है कि कंपनियाँ स्वदेशी एलएलएम की तरफ रुख कर रही हैं।
हाल ही में छुट्टियों की प्लानिंग के लिए बहुभाषाई जेनरेटिव एआई (जेन-एआई) सहायक लॉन्च करने वाली मेकमाई ट्रिप के मुख्य तकनीकी अधिकारी (सीटीओ) संजय मोहन ने 'यूनीवार्ता' को बताया कि फिलहाल इसे हिन्दी और अंग्रेजी में शुरू किया गया है आगे जाकर इसमें और भी भाषाओं को जोड़ने की योजना है। उन्होंने कहा कि अगली भाषा कौन सी होगी यह अन्य कारकों के साथ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि उस भाषा में कितना डाटा उपलब्ध है।
श्री मोहन ने कहा कि एलएलएम के लिए विदेशी के साथ दो-तीन भारतीय भाषाओं की कंपनियों से भी करार किया गया है क्योंकि 'भारत' कारोबार करने के लिए सिर्फ विदेशी एलएलएम के साथ काम नहीं चलाया जा सकता।
यूनिसेफ इंडिया में आईटी एवं डिजिटल नवाचार के प्रमुख गिबसन रिउन्गवा ने पिछले दिनों उद्योग संगठन फिक्की के एक कार्यक्रम में कहा था कि 10 में से नौ इंटरनेट यूजर अपनी भाषा में इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि आप जिस भाषा में जानकारी मांग रहे हैं आपको उसी भाषा में उसका उत्तर मिलना चाहिये।
सरकार ने आम लोगों की इसी जरूरत को समझते हुए इंडियाएआई मिशन के तहत इस साल 26 अप्रैल को सर्वम् एआई नाम की कंपनी को भारत के स्वदेशी एलएलएम पारिस्थितिकी तंत्र के विकास की जिम्मेदारी दी है। उसे 120 अरब पैरामीटर पर आधारित ओपन सोर्स एआई मॉडल विकसित करने के लिए कहा गया है ताकि प्रशासन और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच आसान हो सके। ओपन सोर्स होने के कारण इस एलएलएम का इस्तेमाल कोई भी कर सकता है।
इसके अलावा सॉकेट एआई को देश का पहला 120 अरब पैरामीटर वाला ओपन-सोर्स फाउडेशन मॉडल विकसित करने की जिम्मेदारी दी गयी है जो रक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र के लिए देश की भाषाई विविधता के अनुकूल हो। ज्ञानी एआई को 14 अरब पैरामीटर पर आधारित वॉइस एआई फाउंडेशन मॉडल विकसित करने की जिम्मेदारी मिली है जो बहुभाषाई होगा और वास्तविक समय में बोली गयी बात को प्रोसेस कर सकता है। गण एआई नामक कंपनी 70 अरब पैरामीटर वाला एक बहुभाषाई फाउंडेशन मॉडल बनायेगी जिसका लक्ष्य सुपरह्युमन टीटीएस (टेक्स्ट-टू-स्पीच) क्षमता विकसित करना है जो मौजूदा समय के किसी भी दूसरे मॉडल से बेहतर होगा।
इसके अलावा निजी स्तर पर भी कई कंपनियां अपने एलएलएम विकसित कर रही हैं जिनसे अब तक बड़े शहरों तक सीमित कंपनियों के लिए बाजार का विस्तार संभव हो सकेगा और छोटे शहरों तथा गांवों के लोगों को भी बेहतर बाजार मिल सकेगा।

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