सेवा पखवाड़ा – 2025

गोरखपुर( दुर्गेश मिश्र)। सेवा पखवाड़ा – 2025 के अंतर्गत दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गाँवों के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आयोजित विविध सांस्कृतिक एवं साहित्यिक प्रतियोगिताओं का आज सफल समापन हुआ। इन प्रतियोगिताओं में भाषण, चित्रकला, कहानी-कथन, देशभक्ति गीत गायन तथा अभिनय जैसी गतिविधियों का आयोजन किया गया था।

 इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों में छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने तथा उनमें आत्मविश्वास का संचार करने का प्रयास किया गया। प्रतियोगिता के विभिन्न चरणों में बच्चों ने अपने विचारों, कला एवं गीत-संगीत के माध्यम से अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। निर्णायक मंडल द्वारा चयनित कुल 4 विद्यार्थियों को पूर्व में ही विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के अवसर पर महामहिम राज्यपाल महोदया द्वारा पुरस्कृत किया जा चुका था। शेष विजयी विद्यार्थियों को आज विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए।

कुलपति महोदय ने बच्चों को पुरस्कार एवं आशीर्वाद देते हुए कहा कि –“गाँवों के इन बच्चों में अपार संभावनाएँ छिपी हुई हैं। यदि इन्हें उचित मंच और अवसर प्रदान किए जाएँ तो ये भविष्य में किसी भी ऊँचाई को छू सकते हैं और समाज व राष्ट्र का नाम रोशन कर सकते हैं।”

इस अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी श्री नारायण मिश्र ने भी उपस्थित बच्चों को आशीर्वाद दिया और शिक्षकों को बधाई प्रेषित करते हुए कहा कि विद्यालय स्तर पर इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

कार्यक्रम का विषय प्रवर्तन राष्ट्रीय सेवा योजना के संयोजक डॉ. सत्यपाल सिंह द्वारा किया गया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाइयों से जुड़े कार्यक्रम अधिकारी –

डॉ. आलोक कुमार, डॉ. सुशील कुमार, डॉ. कुसुम रावत, डॉ. स्मृति मल्ल ,डॉ. सुमन कनौजिया, डॉ. नुपुर सिंह एवं डॉ. दीपक सिंह उपस्थित रहे।

साथ ही प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं में –

मधुलिका मिश्रा, सरिता चौधरी, किरण, नयनतारा पांडे, मीना मिश्रा, रामअयोध्या सिंह, संतोष सिंह, आशुतोष सिंह, गोरख गुप्ता, अजय सिंह, सुषमा भारती, श्वेता सिन्हा, कुमकुम सिंह, प्रतिमा सिंह, कृष्णा सिंह, सीमा सिंह एवं शशिकला आदि सम्मिलित रहे।

कार्यक्रम स्थल पर बच्चों की प्रस्तुतियों एवं उत्साह ने समूचे वातावरण को जीवंत और उल्लासपूर्ण बना दिया। उपस्थित अभिभावकों एवं शिक्षकों ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की।

राष्ट्रीय सेवा योजना की यह पहल न केवल बच्चों को प्रोत्साहित करने वाली रही, बल्कि इससे ग्रामीण अंचल के विद्यालयों में रचनात्मकता एवं शैक्षिक वातावरण को भी नई दिशा मिली है।

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