22 सितंबर से आरंभ होगा शारदीय नवरात्र, घटस्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः 6.11 से 7:52 बजे तक


गोरखपुर, (दुर्गेश मिश्र)। आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होने वाला शारदीय नवरात्र इस बार सोमवार, 22 सितंबर 2025 से आरंभ हो रहा है। यह पावन पर्व 2 अक्टूबर तक चलेगा। नवरात्रि का यह कालखंड देवी दुर्गा की साधना और शक्ति उपासना का सर्वश्रेष्ठ अवसर माना जाता है।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

पंडितों के अनुसार, घटस्थापना का सर्वश्रेष्ठ समय प्रातः 6:11 बजे से 7:52 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त अभिजित मुहूर्त 11:51 से 12:39 बजे तक शुभ माना गया है। श्रद्धालुओं से अपेक्षा की गई है कि वे प्रातःकाल ही कलश स्थापना कर विधिवत पूजन प्रारंभ करें।

नवरात्रि का धार्मिक महत्व

नवरात्रि का पर्व देवी दुर्गा की आराधना के लिए समर्पित है। मान्यता है कि इसी काल में मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार कर धर्म और सत्य की स्थापना की थी। नौ दिनों तक भक्तजन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री — की आराधना करते हैं।

पूजन एवं कलश स्थापना की विधि


पूजन से पूर्व भक्त स्नान-ध्यान कर गंगाजल से स्थान की शुद्धि करते हैं।

कलश में शुद्ध जल, सुपारी, सिक्का, दूर्वा और अक्षत स्थापित कर उस पर नारियल और आम्रपत्र रखे जाते हैं।

कलश को लाल वस्त्र से आच्छादित कर मां दुर्गा का आवाहन किया जाता है।

धूप, दीप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित कर भक्तजन दिनभर व्रत रखते हैं और संध्या आरती संपन्न करते हैं।

हाथी पर सवार होकर आगमन

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। हाथी पर आगमन को समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है।

ज्योतिषाचार्य का मत

गोरखपुर विष्णु भगवान मंदिर के पुजारी  एवं ज्योतिषाचार्य पंडित रवि मिश्रा ने बताया, “नवरात्र केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि आत्मिक साधना का भी पर्व है। घटस्थापना का समय अत्यंत पावन होता है। इस वर्ष मां दुर्गा का हाथी पर आगमन हो रहा है, जो समाज में सुख-शांति और अन्न-धन की वृद्धि का संकेत है।”

मंदिरों और घरों में तैयारी पूर्ण

नवरात्र के शुभारंभ को लेकर गोरखपुर एवं आसपास के क्षेत्रों के मंदिरों में विशेष सजावट की गई है। घर-घर में श्रद्धालु घटस्थापना की तैयारी में जुटे हैं। देवी पंडालों में प्रतिमाओं की स्थापना का कार्य अंतिम चरण में है और सोमवार को प्रातः से ही पूजा-अर्चना का क्रम आरंभ हो जाएगा।

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