शिक्षकों/शिक्षामित्रों को कक्षा-3 की संदर्शिका करेगी गाइड

लखनऊ 10 सितंबर ( वार्ता ) उत्तर प्रदेश के 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत 5.75 लाख से अधिक शिक्षकों और शिक्षामित्रों का मार्गदर्शन अब कक्षा-3 की हिंदी और गणित विषय की शिक्षक संदर्शिका करेगी।

शिक्षकों को यह संदर्शिका इसका वितरण 'किताब वितरण ऐप' के माध्यम से किया जा रहा हैं। इस संदर्शिका को प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों के लिए विकसित किया गया है। यह शिक्षक डायरी के उपयोग, रखरखाव और वितरण आदि के सम्बन्ध में सभी सूचनाएं/निर्देश उपलब्ध कराती है।
परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक सामग्री की पारदर्शी और समयबद्ध आपूर्ति के लिए ‘किताब वितरण ऐप’ शुरू किया गया है। यह क्यूआर कोड आधारित ऐप पाठ्यपुस्तकें, कार्यपुस्तिकाएं, शिक्षक संदर्शिकाएं और अन्य सामग्री अंतिम स्तर तक समय पर पहुँचाने की सुविधा देता है। जिला और खण्ड शिक्षा अधिकारी, एसआरजी, एआरपी, डायट मेंटर, प्रधानाध्यापक और शिक्षक सामग्री प्राप्त होते ही क्यूआर कोड स्कैन कर विवरण दर्ज करेंगे, जिससे राज्य परियोजना कार्यालय को वास्तविक समय में निगरानी और कार्यवाही की सुविधा होगी।
स्कूल शिक्षा की महानिदेशक कंचन वर्मा ने कहा कि यह प्रयास शिक्षा सुधार की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। इससे सरकार को वास्तविक समय में जानकारी मिलेगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और शिक्षण की गुणवत्ता में ठोस सुधार सुनिश्चित होगा।
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह का कहना है कि उत्तर प्रदेश की परिषदीय शिक्षा व्यवस्था आज अभूतपूर्व बदलाव के दौर से गुजर रही है। राज्य के 1.33 लाख परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत 1.48 करोड़ बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए हमारे 5.75 लाख से अधिक शिक्षक और शिक्षामित्र पूरी निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है, हर बच्चे तक उत्कृष्ट शिक्षा पहुँचाना और उत्तर प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में आदर्श बनाना है।
गौरतलब है कि शिक्षक संदर्शिकाओं की आपूर्ति और रिपोर्टिंग अब पूरी तरह से तकनीकी माध्यम पर आधारित है। किताब वितरण ऐप के माध्यम से प्रत्येक विद्यालय में प्राप्त पुस्तकों की स्कैनिंग और ऑनलाइन अभिलेखन किया जा रहा है। इस प्रणाली से राज्य स्तर से सीधे निगरानी की सुविधा उपलब्ध है और समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। इस प्रक्रिया में जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय की गई है, जिसमें बीएसए, बीईओ, प्रधानाध्यापक और शिक्षक तक की भूमिका निर्धारित है। भौतिक सत्यापन एसआरजी, एआरपी और डायट मेंटर द्वारा किया जाएगा, जबकि हर स्तर पर अनिवार्य रिपोर्टिंग और निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

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