चुनाव आयोग ने लिया देशभर में एसआईआर शुरू करने की तैयारियों का जायजा

नयी दिल्ली, 10 सितंबर (वार्ता) बिहार की तरह देश भर में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) लागू करने की दिशा में बुधवार को राष्ट्रीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने बुधवार को राजधानी दिल्ली में सभी राज्यों एवं केंद्र शासित क्षेत्रों के मुख्य चुनाव अधिकारियों (सीईओ) के साथ बैठक कर इसकी तैयारियों की समीक्षा की।

भारतीय अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान (आईआईआईडीईएम) में दिन भर चली इस बैठक का उद्घाटन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने किया। बैठक में चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी शामिल थे। राज्यों के सीईओ का राजधानी में इस साल आयोजित होने वाला यह तीसरा सम्मेलन था। जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सीईओ मौजूद थे।
आयोग की एक विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में बिहार के सीईओ ने एसआईआर लागू करने की रणनीतियों, बाधाओं और अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाओं पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी । आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों की एसआईआर प्रक्रिया शुरू करने लिए उनके मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालयों की तैयारियों का आकलन किया। विभिन्न सीईओ ने अपने अपने राज्य / केंद्र शासित क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या, पिछली एसआईआर की तिथि और पिछली पूर्ण एसआईआर के अनुसार अपने-अपने राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची पर विस्तार से प्रस्तुति दी।
मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने के लिए सुझाए दस्तावेज़ भी प्रस्तुत किए, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से छूट न जाए और कोई भी अपात्र व्यक्ति इसमें शामिल न हो सके। यह बताया गया कि इन दस्तावेज़ों से पात्र नागरिकों के लिए एसआईआर में भाग लेने में आसानी हो जाएगी। सम्मेलन में आयोग ने डीईओएस, ईआरओएस, एईआरओएस, बीएलओएस और बीएलएएस की नियुक्ति और प्रशिक्षण की स्थिति की भी समीक्षा की।
इसके अलावा सम्मेलन में मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने राज्य क्षेत्र की मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की वेबसाइट पर पिछले एसआईआर के बाद मतदाता सूची के डिजिटलीकरण और अपलोडिंग की भी जानकारी दी गयी। इसके अलावा राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में पिछले एसआईआर के अनुसार वर्तमान मतदाताओं की मैपिंग की स्थिति भी प्रस्तुत की।
इसके साथ ही आज आयोग की ओर से राज्यों के सीईओ को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि उनके यहां आगे से किसी भी मतदान केंद्र पर 1,200 से अधिक मतदाता न हों और आयोग की पहलों का एक समान रूप से कार्यान्वयन हो।

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