जन्मजात हृदय रोगों से बच्चों को बचाने पर शोध को बढ़ावा देगा एसजीपीजीआई

लखनऊ 11 सितंबर ( वार्ता) बच्चों में होने वाले जन्मजात आनुवंशिक हृदय रोगों के उपचार के लिए संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान शोध को बढ़ावा देगा। इसके लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से संस्थान को 4.8 करोड़ रुपये अनुदान के रूप में मिले हैं।

एसजीपीजीआई के स्टेम सेल अनुसंधान केंद्र के एडिशनल प्रोफेसर डॉ चंद्र प्रकाश चतुर्वेदी ने बताया कि यह अनुदान अलग थलग जन्मजात हृदय दोष की आनुवंशिक और आणविक जड़ों को उजागर करने के उद्देश्य से किए जाने वाले उन्नत शोध का समर्थन करेगा। उन्होंने बताया की इसमें मातृ और प्रजनन स्वास्थ्य विभाग की प्रोफेसर मन्दाकिनी प्रधान और डॉ नीता सिंह सह प्रधान अन्वेषक के रूप में कार्य करेंगी और प्रभावित भ्रूणों की नैदानिक जांच, स्क्रीनिंग तथा अम्नियोटिक द्रव के नमूने एकत्र करने की देखरेख करेंगी। जबकि डॉ दिनेश कुमार, अतिरिक्त प्रोफेसर, जैव चिकित्सीय अनुसंधान केंद्र , चयापचय विज्ञान पर ध्यान केंद्रित करेंगे ताकि आईसीएचडी से जुड़े जैव रासायनिक परिवर्तनों को समझा जा सके। वही डॉ मनाली जैन मुख्य वैज्ञानिक के रूप में कार्य करेंगी और शोध छात्रों के साथ मिलकर इस परियोजना को आगे बढ़ाएँगी।
उन्होंने बताया कि यह अध्ययन अत्याधुनिक बहु ओमिक्स विधियों जैसे सम्पूर्ण जीनोम अनुक्रमण, ट्रांसक्रिप्टोमिक्स, प्रोटीओमिक्स और चयापचय विज्ञान का उपयोग करके आईसीएचडी की उत्पत्ति की जांच करेगा और बेहतर नैदानिक तथा चिकित्सीय उपाय विकसित करेगा। डॉ चतुर्वेदी ने कहा कि यह परियोजना परिवारों को आशा देने और नन्हीं जिंदगियों को बचाने की दिशा में एक कदम है। अलग थलग जन्मजात हृदय दोष से संबंधित आणविक पैटर्न को पहचान कर, शोधकर्ता जैविक तंत्र को स्पष्ट करने, महत्वपूर्ण जीन और प्रोटीन सूचक की पहचान करने तथा प्रारंभिक निदान करने की दिशा में शोध केंद्रित रहेगा।

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