विधायक हर्षवर्धन के खिलाफ दाखिल चुनाव याचिका पर हाईकोर्ट ने मांगा दस्तावेजी साक्ष्य

प्रयागराज , (दिनेश तिवारी ) इलाहाबाद उच्च  न्यायालय  ने प्रयागराज शहर उत्तरी से भारतीय जनता पार्टी  (भाजपा) विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी के चुनाव की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर आठ बिंदु तय कर दोनों पक्षों से दस्तावेजी साक्ष्य मांगा है।

    न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा ने कांग्रेस प्रत्याशी अनुग्रह नारायण सिंह की ओर से दायर चुनाव याचिका पर  यह आदेश दिया है। मामले मे   अगली सुनवाई 10 अक्टूबर को होगी।

              याचिका में हर्षवर्धन पर शैक्षणिक योग्यता और सोशल मीडिया अकाउंट से संबंधित जानकारी को छिपाने या गलत बताने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा चुनाव एजेंट की नियुक्ति में भी कानूनी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। न्यायालय  ने चुनाव की वैधता पर आठ प्रमुख बिंदुओं पर दोनों पक्षों से साक्ष्य और जवाब मांगा है।

         पूछा है कि क्या निर्वाचित उम्मीदवार (हर्षवर्धन बाजपेयी) की ओर से 2003 में बीई और बीटेक पाठ्यक्रमों को पूरा करने के संबंध में विरोधाभासी जानकारी प्रदान करने पर उनका चुनाव रद्द किया जा सकता है। क्या सोशल मीडिया में दी गई जानकारी गलत होने पर चुनाव प्रभावित होगा। क्या जब प्रतिवादी की ओर से अमित शर्मा बिना किसी प्राधिकरण के चुनाव एजेंट के रूप में कार्य कर रहे थे तो इससे चुनाव प्रभावित होगा। क्या ब्रीफ होल्डर के रूप में काम कर रहे अमित शर्मा का चुनाव एजेंट बनना अनुमन्य था।

          क्या उच्च    न्यायालय   में स्थायी वकील अतुल कुमार श्रीवास्तव के मतगणना एजेंट के रूप में काम करने पर चुनाव रद्द हो जाएगा। क्या नामांकन पत्र सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी न देने पर चुनाव रद्द हो जाएगा। क्या नामांकन पत्र में दी गई जानकारी गलत पाए जाने पर आम जनता के ‘जानने के अधिकार’ पर असर पड़ेगा। क्या गलत जानकारी दिए जाने के कारण चुनाव परिणाम पर कोई असर पड़ेगा।

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