ट्रिपल आई टी में पुरा छात्र सम्मेलन इंडस्ट्री–अकादमिक कॉन्क्लेव के साथ संपन्न

प्रयागराज, ( दिनेश तिवारी) भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद  में तीन दिवसीय वैश्विक पुरा छात्र सम्मेलन (ग्लोबल एलुमनाई मीट) का रविवार को  इंडस्ट्री–अकादमिक कॉन्क्लेव के साथ झलवा परिसर में सफल समाप्त  हुआ। इस अवसर पर देश-विदेश से आए पूर्व छात्र, उद्योग जगत के विशेषज्ञ, शिक्षाविद और वर्तमान छात्र एक साझा मंच पर एकत्रित हुए।

            यह सम्मेलन सहयोग को मजबूत करने, शोध के अवसरों को बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने की नई प्रतिबद्धता के साथ संपन्न हुआ कि छात्र उद्योग जगत के लिए तैयार हों, साथ ही ट्रिपल आई टी  की शैक्षणिक उत्कृष्टता और नवाचार की परंपरा को भी कायम रखा जाए। आयोजन का उद्देश्य उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सहयोग को और मजबूत करना, शोध के अवसर बढ़ाना और छात्रों को उद्योग के अनुरूप तैयार करना था।

         उद्योग-अकादमिक सम्मेलन में शीर्ष कॉर्पोरेट नेताओं, शोधकर्ताओं और संकाय सदस्यों की सक्रिय भागीदारी देखी गई, जिन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों, नवाचार, उद्यमिता और कौशल विकास पर पैनल चर्चाओं और कार्यशालाओं में भाग लिया। कॉन्क्लेव में आयोजित पैनल चर्चा और कार्यशालाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, उद्यमिता और कौशल विकास जैसे विषयों पर विमर्श हुआ।

           ट्रिपल आई टी के निदेशक प्रो. मुकुल एस. सुतावाने ने पुरा छात्रों से संस्थान  में आज के सर्वश्रेष्ठ मस्तिष्कों को पोषित करने का आवाहन किया । उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि पूर्व छात्रों के सहयोग से भविष्योन्मुखी शोध संभव है, जबकि कॉर्पोरेट मार्गदर्शन पाठ्यक्रम में मूल्यवर्धन कर सकता है और समाज के लिए प्रभावशाली परिणाम उत्पन्न कर सकता है। विकसित भारत 2047 के विज़न पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने कहा कि जिस तरह टाटा और बिड़ला जैसे उद्योगपतियों ने शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की, उसी तरह शैक्षणिक संस्थान भी उद्योग स्थापित कर सकते हैं - उदाहरण के तौर पर उन्होंने स्टैनफोर्ड में गूगल की स्थापना का हवाला दिया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अनुवादात्मक अनुसंधान राष्ट्र के लिए धन उत्पन्न करेगा और उन्होंने झलवा परिसर में उद्योगों के विकास को प्रोत्साहित किया।

           डीएसएमएनआर विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति प्रो. संजय सिंह ने ट्रिपल आई टी इलाहाबाद को उत्कृष्टता के 25 वर्ष पूरे करने पर बधाई दी और प्रयागराज के साथ अपने जुड़ाव को याद किया, जहाँ से राष्ट्र सेवा की उनकी यात्रा शुरू हुई थी। उन्होंने विकास की साझा ज़िम्मेदारी के रूप में पूर्व छात्र-संस्थान संबंधों को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया और पूर्व छात्रों, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सार्थक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सम्मेलन की सराहना की।

      अपने अनुभव का हवाला देते हुए उन्होंने समावेशिता पर ज़ोर दिया और शिक्षा जगत और उद्योग जगत द्वारा समाज के कमज़ोर वर्गों का संयुक्त रूप से समर्थन करने और अनुसंधान को सामाजिक प्रभाव में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो. सिंह ने दोनों के बीच हुए समझौता ज्ञापन का स्वागत किया और पुरा छात्रों से अपने संस्थान के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने का आग्रह किया।

          आईएसएसए डीआरडीओ के वैज्ञानिक-एच एवं निदेशक, डॉ. एस. बी. तनेजा ने आधुनिक युद्धक्षेत्र में साइबर और ड्रोन तकनीक की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया। आधुनिक युद्ध अब साइबरस्पेस और ड्रोन तक फैल गया है, जहाँ कम लागत वाली प्रौद्योगिकियाँ भी अरबों डॉलर की प्रणालियों को बाधित कर सकती हैं। उन्होंने भारत की रक्षा और अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने में एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीकों और उन्नत उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। त्वरित नवाचार की आवश्यकता पर बल देते हुए, उन्होंने छात्रों से प्रौद्योगिकियों का सह-निर्माण करने, चुनौतियों को अवसरों में बदलने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि रक्षा-स्तरीय नवाचार कृषि, आपदा प्रबंधन और ग्रामीण उद्यमिता के लिए भी उपयोगी हों।

         पुरा  छात्र अधिष्ठाता प्रो. अनुपम अग्रवाल ने यह आयोजन केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य की राह बनाने का सामूहिक संकल्प है। उन्होंने कहा यहां साझा की गई अंतर्दृष्टि ट्रिपल आई टी इलाहाबाद में शैक्षणिक-उद्योग सहयोग के अगले चरण को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

            प्रो. मनीष गोस्वामी, डीन, अकादमिक एवं अनुसंधान, ने आईआईआईटीए के अनूठे शैक्षणिक ढांचे पर प्रकाश डाला, जो छात्रों को गणित, उद्यमिता और अर्थशास्त्र जैसे क्षेत्रों में मामूली विशेषज्ञता के साथ बी.टेक की डिग्री के साथ स्नातक होने का अवसर प्रदान करता है, जिससे वे उद्योग की उभरती मांगों को पूरा करने के लिए तैयार होते हैं।

               उन्होंने बताया कि संस्थान ने 20 से ज़्यादा स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट किया है, पिछले एक साल में 20 से ज़्यादा शोध परियोजनाएँ प्रस्तुत की हैं और 3,000 के औसत उद्धरण सूचकांक के साथ एक मज़बूत शोध प्रभाव बनाए रखा है। प्रो. गोस्वामी ने सहयोग के लिए अपने 3पी  विज़न को रेखांकित किया—उत्पाद-उन्मुख अनुसंधान, अनुसंधान में छात्रों की भागीदारी, और पूर्व छात्रों व उद्योग द्वारा प्रतिफल।

       आईटी विभाग प्रमुख, प्रो. मनीष कुमार ने साइबर सुरक्षा, बिग डेटा और उभरते क्षेत्रों जैसी परिवर्तनकारी तकनीकों में कमियों की ओर इशारा किया और पूर्व छात्रों व उद्योग की भागीदारी से संयुक्त अनुसंधान केंद्रों और उत्कृष्टता केंद्रों के निर्माण का प्रस्ताव रखा। उन्होंने एआई, साइबर सुरक्षा और क्वांटम तकनीकों में ट्रिपल आई टी ए  की पहलों पर प्रकाश डाला और पूर्व छात्रों व उद्योग से नवाचार और राष्ट्रीय विकास को बढ़ावा देने में सक्रिय रूप से भागीदारी करने का आग्रह किया।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सपा अध्यक्ष को लगता है कि मुसलमान उनकी जेब में हैं: मायावती

हार-जीत से बड़ा है सक्षम बनना

24 जुलाई 2026 को चंद्रमा दिखाई देगा अन्टारेस (ज्येष्ठा नक्षत्र के योगतारा) के पास