शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोलीबारी से भड़की हिंसा: नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के पौत्र का बयान

लखनऊ, 09 (वार्ता) नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री कुंवर इंद्रजीत सिंह के पौत्र यशवंत शाह ने राजधानी काठमांडू में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के हिंसक होने के लिए वहां की सरकार और पुलिस को दोषी ठहराते हुए मंगलवार को कहा कि किसी भी देश में बेकसूर लोगों पर बल प्रयोग स्वीकार्य नहीं है।

श्री शाह ने कहा कि जनरेशन जेड का यह प्रदर्शन भ्रष्टाचार के खिलाफ था। सभी लोग आठ सितंबर को एक शांतिपूर्ण विरोध-मार्च में भाग लेने के लिए 'माइटीघर मंडला' नामक स्थान पर एकत्र हुये थे।
उन्होंने कहा, “ जब वहां लोगों की संख्या बढ़ने लगी, सरकार ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल किया। पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी। स्थिति तब बिगड़ी जब पुलिस ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चला दीं। किसी भी लोकतांत्रिक देश में बेकसूर नागरिकों पर बल प्रयोग और गोलीबारी स्वीकार्य नहीं है।”
श्री शाह ने कहा कि ऐसे मौकों पर आमतौर पर रबर बुलेट का इस्तेमाल किया जाता है, वह भी कमर के नीचे। लेकिन सबने देखा कि कैसे एक छोटे बच्चे को सिर में गोली मारी गयी - वह भी संसद भवन के बाहर।
उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद जनता का आक्रोश भड़क उठा और शांतिपूर्ण विरोध हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति भवन सहित कई सरकारी इमारतों में आग लगा दी।
उल्लेखनीय है कि नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन सोमवार को प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की गोलीबारी के बाद हिंसक हो गया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने मंगलवार को संसद भवन समेत कई इमारतों को आग लगा दी। प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।
श्री शाह ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ओली अपने पद का दुरुपयोग कर रहे थे, अपने स्थान पर जमे रहे। जब स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गयी, तब सेना के हेलीकॉप्टर की मदद से उन्हें बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्होंने इस्तीफा दिया और राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया।
यशवंत शाह ने कहा, "यह सब एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन से सही से न निपट पाने के कारण हुआ। मुझे उम्मीद है कि अगले 24 घंटे में नेपाल में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगेगी, लेकिन पूरी तरह से शांति बहाल होने में कुछ समय लग सकता है।"
उन्होंने बताया कि अब तक 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अस्पताल के ट्रॉमा सेंटरों में जिनका इलाज चल रहा है, पुलिस उन्हें भी उठाकर गिरफ्तार कर रही है। उन्होंने कहा, "यह आग में घी डालने जैसा है, जिससे जनता और अधिक आक्रोशित हो गयी है, और यह गुस्सा अब पूरे देश में फैल गया है।"
उन्होंने कहा कि यह कहना गलत होगा कि प्रदर्शन केवल काठमांडू में हो रहा है। विराटनगर, धनगढ़ी, बुटवल, भैरहवा जैसे तमाम शहरों में भी यही स्थिति है।

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