हवा में उपचार: वृक्ष-उत्सर्जित टरपीन मानव शरीर-क्रिया और स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं

प्रयागराज ,22 सितंबर (दिनेश तिवारी)। प्रयागराज के  विश्वप्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार सोनकर ने लोगों का  इस तथ्य पर ध्यान आकर्षित किया है कि वृक्षों से उत्सर्जित फाइटोनसाइड्स, वाष्पशील कार्बनिक यौगिक मानव स्वास्थ्य को समर्थन देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन यौगिकों में अल्फा-पिनान  और लिमोनीन जैसे टरपीन शामिल हैं, जिन्हें शारीरिक और मनोवैज्ञानिक लाभों के लिए तेजी से मान्यता मिल रही है।

पद्मश्री  पुरस्कार प्राप्त डॉ. सोनकर के अनुसार, फाइटोनसाइड्स मानव प्रतिरक्षा प्रणाली पर नेचुरल किलर कोशिकाओं की सक्रियता को बढ़ाकर प्रत्यक्ष प्रभाव डालते । ये कोशिकाएँ संक्रमणों और घातक (कैंसरजन्य) परिवर्तनों के विरुद्ध शरीर की पहली रक्षा-पंक्ति होती हैं। उन्होंने कहा, “वृक्षों से उत्पन्न वाष्पशील यौगिकों के संपर्क से प्रतिरक्षा कार्यप्रणाली में सुधार होता है, तनाव हार्मोन (जैसे कॉर्टिसोल) का स्तर घटता है और शरीर में संतुलन (होमियोस्टैसिस) को प्रोत्साहन मिलता है।”

विश्वप्रसिद्ध वैज्ञानिक ने बताया  कि प्रतिरक्षा संबंधी लाभों के अतिरिक्त, डॉ. सोनकर ने फाइटोनसाइड्स के न्यूरो-साइकोलॉजिकल प्रभावों पर भी प्रकाश डाला। इन यौगिकों से समृद्ध वन्य वातावरण में नियमित संपर्क को कम चिंता, बेहतर मनोदशा और गहन नींद की गुणवत्ता से जोड़ा गया है। यह दर्शाता है कि प्राकृतिक पारिस्थितियाँ मानव कल्याण पर बहुआयामी प्रभाव डालती हैं।

डॉ. सोनकर ने निष्कर्ष के रूप में कहा कि वनों का संरक्षण केवल एक पारिस्थितिक आवश्यकता ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीति का भी अभिन्न अंग होना चाहिए। प्राकृतिक वातावरण में फाइटोनसाइड्स की निरंतर उपस्थिति इस बात का ठोस वैज्ञानिक आधार प्रदान करती है कि मनुष्य और वनों के बीच चिकित्सीय अंतःक्रिया पर अंतःविषयक शोध को और आगे बढ़ाये जाने कि आवस्यकता पर बल दिया|


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