युवा पीढ़ी को आकर्षित कर रही है आयुर्वेदिक जीवनशैली: डॉ. केवी मिनी

गोरखपुर 17 सितम्बर (वार्ता) उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित महाराणा प्रताप महाविद्यालय जंगल धूसड़, गोरखपुर में वनस्पति विज्ञान एवं प्राणी विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वाधान में आयुर्वेद सप्ताह के अंतर्गत .विशिष्ट व्याख्यान कार्यक्रम. का आयोजन किया गया जिसमें गुरु गोरखनाथ इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद साइंस के विशेषज्ञयों द्वारा विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया गया ।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि गुरु गोरखनाथ इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद साइंस, बालापार की सहायक आचार्य डॉ. के. वी. मिनी ने बुध्दवार को कहा कि आज हम सब आयुर्वेद सप्ताह मनाने के लिए एकत्र हुए हैं। आयुर्वेद दिवस केवल एक परंपरा का उत्सव नहींए बल्कि भारतीय चिकित्सा विज्ञान की गौरवशाली धरोहर को पुनः स्मरण करने का अवसर है।
डॉ. मिनी ने आगे कहा कि आयुर्वेद का अर्थ है ..आयुः वेदः.. अर्थात जीवन का विज्ञान। हमारे ऋषियों ने हजारों वर्ष पहले शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को ही स्वास्थ्य की आधारशिला माना। आज जब पूरी दुनिया जीवनशैली संबंधी रोगों से जूझ रही है तब आयुर्वेद हमें सही दिशा दिखाता है। उन्होंने आगे कहा कि आयुर्वेद की तरफ अब दुनिया लौट रही है ।आयुर्वेद घर में उपयोग होने वाली वस्तुओं दवाइयां के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है ।
इसी क्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि के रूप में गुरु गोरखनाथ इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद साइंस, बालापार की सहायक आचार्य डॉ.आर नैयर ने कहा कि प्रधानमंत्री और भारत सरकार ने इसे राष्ट्रीय महत्व का दिवस घोषित कर हमें स्मरण कराया है कि योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा केवल भारत की धरोहर नहीं बल्कि विश्व मानवता को उपहार हैं।
उन्होंने आगे कहा कि 17 से 23 सितंबर तक देश भर में आयुर्वेद सप्ताह मनाया जा रहा है इसके अंर्तगत लोगों को पौधों के प्रति जागरूक करने एवं उसके औषधीय गुणों को बताने का भी कार्य किया जा रहा है।
डॉ. नैयर ने यह भी कहा कि रसोई में उपयोग होने वाले अनेक प्रकार के मसाले जैसे हल्दी, काली मिर्च, जीरा, दालचीनी, लौंग, इलाइची सब में औषधीय गुण पाया जाता है जिसका इस्तेमाल भारतीय सभ्यता में सनातन संस्कृति के अंतर्गत सदियों से होता चला रहा है जिसको सरकार अब घर.घर तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है ।
इस अवसर पर अतिथियों द्वारा कुछ औषधि पौधों जैसे अश्वगंधा, ब्राह्मी, गिलोय, हड़जोड़, बेल इत्यादि का महाविद्यालय के वानस्पतिक उद्यान में रोपड़ भी किया गया।

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