प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना में उत्तर प्रदेश देश में अव्वल

लखनऊ 1 अक्टूबर (वार्ता) प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन (पीएम एफएमई) योजना में उत्तर प्रदेश ने पहला स्थान हासिल किया है। इसमें प्रदेश में बैंकों द्वारा आवेदनों की ऋण स्वीकृति का 98 प्रतिशत स्ट्राइक रेट दर्ज किया गया है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 80 प्रतिशत है।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री का विजन "यही समय, सही समय" खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में निवेश और नवाचार के लिए प्रेरणा बना है। उन्होंने कहा कि खाद्य उत्पादों पर जीएसटी दरों में कमी से मांग बढ़ी है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
अपर मुख्य सचिव (उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण) बी.एल. मीणा की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई वर्चुअल बैठक में भारत सरकार, बैंक प्रतिनिधियों और राज्य अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में उत्कृष्ट प्रदर्शन न करने वाले कुछ बैंकों (एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और पीएनबी) के जोनल अधिकारियों को पत्र भेजने के निर्देश दिए गए। वहीं अयोध्या, सुल्तानपुर, कौशाम्बी और प्रयागराज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और मैनेजरों को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा प्रशस्ति पत्र देने पर सहमति बनी।
उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत परियोजना लागत का 35 प्रतिशत (अधिकतम 10 लाख) अनुदान दिया जाता है। इसके साथ ही प्रदेश की खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत 1 करोड़ से 50 करोड़ तक की परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक 400 से अधिक उद्यमियों की 10 हजार करोड़ से अधिक लागत वाली परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें से 60 परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। अब तक 250 करोड़ का अनुदान जारी किया जा चुका है। विशेष रूप से बरेली, रामपुर और शाहजहाँपुर में देश-विदेश के युवा उद्यमी आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित कर रहे हैं।

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