पीडीए का मतलब ‘पीड़ित, दुखी, अपमानित’ : अखिलेश
लखनऊ 7 अक्टूबर (वार्ता) देश के मुख्य न्यायाधीश पर हुए हमले को लेकर जारी बयानबाजी के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पीडीए समाज को लेकर अपनी आवाज़ बुलंद की है। उन्होंने कहा है कि “कुछ लोगों के हाथ में जाकर तो जूता भी अपमानित महसूस करता है।”
श्री यादव ने एक्स पर लिखा “पीडीए समाज का अपमान करने वाले ऐसे असभ्य लोग दरअसल अपने दंभ और अहंकार के मारे होते हैं। इनकी प्रभुत्ववादी सोच नफ़रत को जन्म देती है, जो देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए जितनी होती है, उतनी ही समाज के सबसे कमज़ोर अंतिम व्यक्ति के लिए भी। ऐसे लोग वर्चस्ववाद की बीमारी से घोर ग्रसित होते हैं। हम इसलिए कहते हैं, पीडीए का मतलब है ‘पीड़ित, दुखी, अपमानित’।”उन्होंने कहा कि "पीडीए समाज की उदारता और भलमनसाहत 5000 सालों से ऐसे लोगों को माफ़ करती आई है, लेकिन इस हद तक अपमान के बाद पीडीए समाज अब और नहीं सहेगा।"
अखिलेश यादव ने कहा “ भाजपा और उसके संगी-साथी अपनी सत्ता के अंतिम दौर में हैं , क्योंकि उनकी भ्रष्ट चुनावी साज़िश का भंडाफोड़ हो चुका है, वो अब कभी नहीं जीतेंगे। इसीलिए हताश होकर वो ऐसे कुकृत्य कर रहे हैं। भाजपाई इस बार जाएंगे तो फिर कभी नहीं आएंगे क्योंकि जब आबादी का 90 प्रतिशत हिस्सा अपने हक़-अधिकार के लिए जाग गया है तो 10 प्रतिशत का गुरूर और सिंहासन अब और नहीं टिकेगा।”
उन्होंने कहा “ भारत के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास में ये दौर ‘अपमान बनाम सम्मान’ के संघर्ष का है। पीडीए अपने स्वाभिमान और स्वमान का ये अंतिम संघर्ष निर्णायक रूप से जीतकर रहेगा।”

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें