‘‘मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और किशोर स्वास्थ्य सेवाओं में आंगनबाड़ी की भूमिका अहम’’
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने नवचयनित मुख्य सेविकाओं के संवेदीकरण कार्यक्रम में बताया कि छाया एकीकृत वीएचएसएनडी सत्र पर आशा, आंगनबाड़ी, एएनएम और सीएचओ को समन्वय बना कर सेवाएं देनी होती हैं। इन सत्रों पर प्रसव पूर्व जांच व दवा वितरण, नियमित टीकाकरण, परिवार नियोजन सेवाएं और किशोर स्वास्थ्य सेवाएं प्रमुखता से प्रदान की जाती हैं। प्रसव पूर्व जांच में वजन, रक्तचाप, मधुमेह, यूरिन और पेट की जांच अनिवार्य तौर पर होनी चाहिए। यह देखना चाहिए कि महिला का वजन प्रति माह बढ़ रहा हो। इनमें से किसी भी जांच के दौरान अगर कोई जटिलता महसूस हो तो तुरंत गर्भवती को नजदीकी उच्च चिकित्सा केन्द्र रेफर कर देना चाहिए।
सीएमओ ने बताया कि समुदाय में पांच साल में सात बार का संदेश देकर पांच साल की आयु के सभी बच्चों का नियमित टीकाकरण कराना है। गर्भवती और किशोर-किशोरियों का भी टीकाकरण कराया जाना चाहिए। परिवार नियोजन के सभी साधनों के बारे में योग्य लाभार्थी को जानकारी दें और उन्हें उनकी पसंद का साधन उपलब्ध कराएं। किशोरियों को मासिक धर्म स्वच्छता और संक्रमण के बारे में अवश्य बताएं। इस अवसर पर यूनिसेफ के पोषण विशेषज्ञ सुरेश तिवारी और आईसीडीएस विभाग के अधिकारियों ने सीएमओ का स्वागत किया एवं आभार जताया।
इससे पहले वनटांगिया गांव में जिलाधिकारी की अगुवाई में हुए निरीक्षण के दौरान सीएमओ डॉ झा ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर के बारे में जानकारी दी। उन्हें उपलब्ध सेवाओं से अवगत कराया। इस दौरान चरगांवा के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ वीके चौधरी, एचईओ मनोज कुमार, आरबीएसके टीम, सीएचओ, आशा और एएनएम भी मौजूद रहे।
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