गाय और गंगा भारत की आत्मा, राजनीतिक इच्छाशक्ति में कमी के कारण अस्तित्व खतरे में: स्वामी निश्चलानंद

प्रयागराज, (दिनेश तिवारी ) नई झूंसी स्थित शिवगंगा आश्रम में गोवर्धन मठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा भारत के सभी मनुष्य सुसंस्कृति, सुशिक्षित, संरक्षित, संपन्न, सेवा परायण कार्य करें व हिंदुओं के अस्तित्व की रक्षा और देश की सुरक्षा-अखंडता के लिए कटिबद्ध हों।

उन्होंने  गाय और गंगा को भारत की आत्मा बताया है।  उन्होंने कहा कि कभी गाय व गंगा देश की संस्कृति और समृद्धि की पहचान थी। लोकतंत्र में दोनों को जहां और समृद्ध होना चाहिए, वहीं राजनेताओं की इच्छाशक्ति में कमी के कारण दोनों अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही हैं। भारत में तो गाय की कई नस्ल लुप्त होने के कगार पर हैं।

शंकराचार्य ने कहा गंगा उद्गम क्षेत्र से ही अपनी मौलिक पहचान खो चुकी है। गंगा-यमुना की अविरलता और निर्मलता को लेकर कब तक छलावा होता रहेगा। करोड़ों की आस्था के साथ सरकारें खिलवाड़ करना बंद करें। उन्होंने सभी घरों से प्रतिदिन एक रुपया और एक घंटे का समय हिंदू राष्ट्र हित के लिए निकालने को कहा है।

“आई लव मोहम्मद” पर शंकराचार्य निश्चलानंद ने कहा कि  अपने ईष्ट से प्रेम करना गलत नहीं, उन्माद फैलाना निंदनीय है | सभी के पूर्वज हिंदू थे, जब तक हिंदू सुरक्षित है तब तक पूरा विश्व सुरक्षित है। पुरी शंकराचार्य ने आई लव मोहम्मद पोस्टर के सवाल के संदर्भ मे कहा कि मुसलमान तभी तक सुरक्षित हैं जब तक हिंदू सुरक्षित है। जहां हिंदू नहीं हैं वहां पर मुसलमान आपस में ही लड़कर मर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि नेपाल में फैलाई गई अशांति के पीछे भारत को चारों तरफ से घेरने की साजिश थी। भारत में भी इस तरह का उन्माद फैलाए जाने की भी कोशिश हो रही थी। हालांकि, हमारे देश में ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है। क्योंकि भारत की जनता बेहद समझदार और सकारात्मक सोच वाली है।  पुरी शंकराचार्य ने शनिवार को नई झूंसी स्थित शिवगंगा आश्रम में सात दिवसीय प्रवास पर है |

शंकराचार्य ने युवाओं में लगातार बढ़ रहे अवसाद और उसकी वजह से खुदकुशी पर कहा कि युवाओं में सकारात्मक सोच की लगातार कमी होती जा रही है। वे परिश्रम से भी भाग रहे हैं। युवाओं को भरपूर परिश्रम के साथ-साथ सकारात्मक सोच भी रखनी चाहिए, तभी उनका विकास संभव होगा। जब युवा भरपूर परिश्रम करेंगे तो अपने आप अवसाद से दूर होने लगेंगे।

उन्होंने अवसाद का एक और बड़ा कारण शास्त्र संवत शादियों के न होने की कमी को भी बताया।  उन्होंने कहा कि प्रेम विवाह के कारण भी लगातार तलाक के मामले सामने आ रहे हैं जिससे युवा अवसाद की ओर जा रहे हैं। इसी कारण से खुदकुशी करने जैसा आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। पुरी शंकराचार्य ने कहा कि संयुक्त परिवार की परंपरा से यह सब चीजें कम हो सकती हैं।

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