माघ मेले की तैयारियां शुरू, कराया जा रहा जमीन समतलीकरण
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल के निर्देश के बाद लोक निर्माण विभाग ने तीन पंटून पुलों के टेन्डर जारी कर दिए हैं | काली मार्ग, त्रिवेणी मार्ग, और महावीर मार्ग के पंटून पुलों का निर्माण इसी महीने शुरू हो जाएगा | इसे 15 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है |
उन्होंने बतीय कि मेले कि तयारी के लिए ए तक निकली 25 फीसदी जमीन पर मेल प्राधिकरण ने लेवेलिंग शुरू कर दिया है | मेल इस बार तीन जनवरी को पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व से शुरू हो जाएगा | हर बार मेले का कार्य 15 ऑक्टोबर से शुरू हो जाता है | इस बार बढ़ आउएर जलभराव के करण काम अब तक शुरू नहीं हो सका था |
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों मंडलायुक्त ने अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्देश दिया था कि टेंडर प्रक्रिया तत्काल पूरी कारण |
गौरतलब है कि माघ मेले मे देश के कोने कोने से लाखों श्रद्धालु गृहस्थ कल्पवासी गंगा के तीरे विस्तीर्ण रेती पर भौतिक सुख का त्यागकर अध्यात्म में लीन होकर कायाशोधन का एक माह तक कल्पवास करेंगे। तड़के गंगा स्नान कर अपने-अपने शिविर में भगवान की पूजा, भजन करने के साथ साधु संतों के प्रवचन का श्रवण करेंगे। इस दौरान कल्पवासी भौतिक सुख का त्याग कर सात्विक जीवन जीने का निर्वहन करेंगे।
तीर्थराज प्रयाग में संगम तट पर पौष पूर्णिमा से कल्पवास आरंभ होकर माघी पूर्णिमा के साथ संपन्न होता है। मिथिलावासी मकर संक्रांति से अगली माघी संक्रांति तक कल्पवास करते हैं। इस परंपरा का निर्वाहन करने वाले मुख्यतः: बिहार और झारखंड के मैथिल ब्राह्मण होते हैं जिनकी संख्या बहुत कम होती है। पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु कल्पवास करते हैं।
वैदिक शोध एवं सांस्कृतिक प्रतिष्ठान कर्मकाण्ड प्रशिक्षण केन्द्र के पूर्व आचार्य डा आत्माराम गौतम ने बताया कि पुराणों और धर्म शास्त्रों में कल्पवास को आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए जरूरी बताया गया है। यह मनुष्य के लिए अध्यात्म की राह का एक पड़ाव है, जिसके जरिए स्वनियंत्रण एवं आत्मशुद्धि का प्रयास किया जाता है। हर वर्ष कल्पवासी एक महीने तक संगम गंगा तट पर अल्पाहार, स्नान, ध्यान एवं दान करके कल्पवास करते है।

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