छठ महापर्व संगम तट पर उगते सूर्य को अर्ध्य देने व्रती महिलाओ और श्रद्धालुओ का उमड़ा सैलाब

प्रयागराज, (दिनेश  तिवारी ) आस्था और श्रद्धा के छठ महापर्व पर संगम तट पर उगते सूर्य को अर्ध्य देने व्रती महिलाओ और श्रद्धालुओ का सैलाब  उमड़ पडा | व्रती महिलाओ ने  उगते सूर्य को अर्ध्य देकर अपने व्रत पूरा किये  |

प्रातःकाल गंगा- यमुना के साथ अन्य घाटों पर भव्य नजर देखने को मिल |  चार दिन तक चले  छठ महापर्व का आज फाफामऊ, अरैल, झूसी, संगम, बालुआघाट , और दारागंज सहित  शहर के तमाम घाटों पर लाखों कि संख्या मे  व्रती  महिलाओ ने उगते सूर्य को अर्ध्य निर्जला उपवास का समापन  किया |

भोर होते ही छठ मैया के गीत गूंजने लगे  और छठ मैया के जायकरो से संगम घाट गूँजने लगे | महिलाये पारंपरिक वेशभूषा मे सिर पर  सजे हुए  रखे, अखंड ज्योति के साथ  घाटों कि ओर रावण हुई |  घाटों पर पहुच कर व्रतियों ने  विधि विधान से पूजा अर्चना की  और घुटने भर पनि मे खड़े होकर  उगते भगवान भास्कर को अर्ध्य अर्पित कर परिवार कि सुख समरिद्धी कि कामना की |

महापर्व छठ के अवसर पर  कैबिनेट मंत्री नन्द गोपाल  गुप्ता नंदी, उनको पत्नी पूर्व महापौर अभिलाषा गुप्ता ,  महापौर गणेश केसवानी ने परिवार के साथ संगम तट पर पूजन किया |

दारागंज निवासी  व्रती शिक्षिका सुमन ने बताया कि छठ पूजा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्राकृतिक आराधना व मूर्तिपूजा नहीं बल्कि सूर्य और जल की उपासना है| कठोर व्रत नियम एवं चार दिन का तप, ब्रह्मचर्य, निराहार और संयम से इस पर्व को मनाया जाता है

छठ पूजा एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है जो बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल में मनाया जाता है। इस व्रत मे महिलाये 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती है | यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसकी शुरुआत महाभारत काल में हुई थी, जब द्रौपदी ने सूर्य देव की उपासना की थी। यह पर्व धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है

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