आतिशबाजी के चक्कर में कहीं गंवा न दें आंखें :डॉ अब्बास
ऑप्टोमेट्रिस्ट डॉ एसएम अब्बास ने बताया कि प्रति वर्ष दीपावली के बाद तमाम ऐसे लोग अस्पताल पहुंचते हैं जिनकी आंखों में परेशानी होती है। जो तेज आवाज वाले पटाखे होते हैं उसमें कई तरह के ज्वलनशील पदार्थ व नुकीले कण भरे होते हैं और उसके जलने पर वह सीधे बाहर निकलते हैं। यदि इसमें लापरवाही हुई तो वह सीधे आंखों में पहुंच जाते हैं।
उन्होंने बताया कि आंख बहुत ही नाजुक हिस्सा है। यह थोड़े से ही कण जाने से प्रभावित हो जाते हैं। इसलिए पटाखे जलाते समय चेहरे को और आखों को विशेष रूप से बचाकर रखें। प्रायः जो पटाखे जलाने के बाद नहीं बजते उसके पास बिल्कुल ना जाए कई बार झुक के देखते समय या छूते ही उसमें विस्फोट हो जाता है वो स्थिति बहुत ख़तरनाक हो जाती है। आतशबाज़ी जलाते समय बच्चों पर कड़ी नज़र रखें और उचित दूरी से जलाने का प्रबंध करें ए जलाते समय अपने चेहरे को दूर रखें! दीपावली की खुशियों पर किसी तरह का ग्रहण ना लगे इसके लिए पूरी सावधानी से त्योहार मनाएं ।

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