17 नवंबर की रात्रि में नज़र आयेगी उल्काओं की बरसात, होगा लियोनिड्स उल्का-वृष्टि का चरम बिंदु

खगोल विद अमर पाल सिंह ने बताया कि रात्रि के पूर्वी आकाश  में उभरते सिंह ( लियो) तारामण्डल के निकट से आती दिखाई देंगी चमकीली उल्काएं।

खगोल विद अमर पाल सिंह ने बताया कि नवंबर महीने की प्रमुख खगोलीय घटनाओं में लियोनिड्स उल्का-वृष्टि 17 नवंबर की रात अपने चरम पर होगी। वैसे तो यह रोमांचकारी उल्कावृष्टियों में से एक मानी जाती है क्योंकि इसकी रफ़्तार इसको ख़ास बनाती है लेकिन इस बार यह खगोलीय घटना इस साल 6 से 30 नवंबर तक सक्रिय  है, लेकिन इसका सबसे मनमोहक और चरम दृश्य 17 नवंबर की मध्य रात्रि से 18 नवंबर की भोर के बीच देखा जा सकता है। इस बार की परिस्थितियां उल्का पिंडों को देखने के लिए काफ़ी अनुकूल हैं।

इस चरम समयावधि के दौरान चन्द्रमा भी लगभग 9 प्रतिशत तक ही रोशन दिखाई देगा। इस लिए चंद्रमा की कम रोशनी के कारण और उल्काओं को साधारण आंखों से और भी अच्छे तरीके से देखा जा सकेगा । नवंबर में होने वाली उल्का बर्षा को लियोनिड्स कहा जाता है क्योंकि यह लियो तारामण्डल की तरफ़ से आती हुई नजर आती हैं और इनकी गति उनको विशिष्ट रहस्यमई बनाती है और इसकी खासियत है कि ये उल्काएं लगभग 71 किलोमीटर प्रति सेकंड की अति तेज गति से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती हैं और उच्च वायुमंडलीय घर्षण के कारण जल जाती हैं उसके कारण ही यह चमकीली रेखाएं सी बनाती हुईं नज़र आती हैं, जिन्हें आम बोल चाल की भाषा में लोग ‘टूटते तारों’ के नाम से भी जानते हैं। लेकिन खगोल विज्ञान की भाषा में इनको उल्का बर्षा ( मीटीयोर शॉवर) ही कहा जाता है।

खगोल विद अमर पाल सिंह ने बताया कि लियोनिड्स उल्का-वृष्टि का संबंध धूमकेतु 55P/टेम्पल-टटल से है, जो सूर्य की परिक्रमा 33 वर्षों में पूरी करता है। जब कोई धूमकेतु, सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की कक्षा से गुजरते हुए सूक्ष्म धूलिकणों को छोड़ता जाता है और पृथ्वी जब इसी वार्षिक पथ से होकर गुजरती है, तो यही धूलकण घर्षण के कारण वायुमंडल से उच्च गति से टकराते हैं तो प्रकाश की चमकीली धारियां बनाते हैं। और इस अवधि में कभी-कभी घंटों में दर्जनों  उल्काएं भी दिखाई दे सकती हैं, जिससे शानदार आकाशीय आतिशबाजी जैसी नजर आती है।

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला ( तारामण्डल) गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार किन्हीं भी उल्का वृष्टि का देखने के लिए आपको प्रकाश प्रदूषण से पूरी तरह से दूर और किसी साफ़ स्वच्छ एवम् खुले और सुरक्षित स्थान का चयन कर करके मध्य रात्रि के बाद पूर्वी आकाश में सिंह तारामण्डल ( लियो कॉन्स्टेलेशन) की ओर देखें वैसे यह उल्का बर्षा (मीटीयोर शॉवर) किसी भी दिशा से संपूर्ण आसमान में नज़र आयेगी और इस खगोलीय घटना को साधारण आंखों से भी देखा जा सकता है। इसके लिए किसी भी ख़ास उपकरण जैसे दूरबीनों/ टेलिस्कोप आदि की भी जरूरत नहीं है।

किन्हीं भी विशेष खगोलीय जानकारियों हेतु संपर्क कर सकते हैं। 

©अमर पाल सिंह, खगोलविद बीर बहादुर सिंह, नक्षत्रशाला( तारामण्डल) गोरखपुर।

संपर्क सूत्र 7355546489 

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