चिकित्सकों और स्टॉफ नर्सेज ने सीखीं एनीमिया मुक्ति की बारीकियां

गोरखपुर। जिले के बारह सरकारी अस्पतालों से जुड़े चिकित्सकों और स्टॉफ नर्सेज ने मंगलवार को एम्स गोरखपुर में एनीमिया मुक्ति की बारीकियां सीखीं। एम्स गोरखपुर और यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित इस क्षमता संवर्धन कार्यक्रम में एम्स गोरखपुर से स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ शिखा सेठ, बाल रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ महिमा मित्तल, कम्युनिटी एंड प्रिवेंटिव मेडिसिन डिपार्टमेंट के हेड डॉ आनंद मोहन दीक्षित, स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सीएमओ गोरखपुर डॉ राजेश जा और यूनिसेफ की तरफ से डॉ अर्पिता पाल, डॉ सत्या चंचल सहित कई विषय विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा सभी प्रतिभागियों को बताया गया कि गंभीर एनीमिया में केवल आयरन की गोली या सिरप पर्याप्त नहीं होते। ऐसे में इंट्रा-वीनस आयरन सुक्रोज एक तेज, सुरक्षित और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपचार है। यह शरीर में आयरन की कमी को तेजी से पूरा करता है। साथ ही हीमोग्लोबिन को शीघ्र बढ़ाता है। इससे माता को प्रसव के लिए बेहतर स्वास्थ्य स्थिति में लाने में मदद मिलती है और यह अनावश्यक रेफरल एवं जटिलताओं को कम करता है।

सीएमओ डॉ राजेश झा ने अपने सम्बोधन में कहा कि उन्हें विश्वास है कि इस मुहिम में सक्रिय भागीदारी से मातृ एनीमिया में स्पष्ट कमी आएगी। जिले में स्वस्थ गर्भधारण और सुरक्षित प्रसव के अवसर बढ़ेंगे और जनपद में मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार होगा। डॉ झा ने कहा कि यह केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि मातृ सशक्तिकरण और स्वस्थ समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि सभी  गंभीर एनीमिक गर्भवती को समय से आयर सुक्रोज की सुविधा मिले ताकि उनकी और उनके शिशु की सेहत सुरक्षित रहे।

इस अवसर पर एनएचएम से जुड़े कंसल्टेंट्स, यूनिसेफ से सुरेश तिवारी, प्रवीण दूबे और श्रीम द्विवेदी सहित सभी प्रशिक्षु चिकित्सक और स्टॉफ नर्सेज मौजूद रहीं।

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