सहनस्त्रा नदी से मिला डायनासोर का जीवाश्म

सहारनपुर, 5 नवंबर (वार्ता) सहारनपुर में शिवालिक पहाड़ियों से निकली सहनस्त्रा नदी के किनारे से ट्राईशेरा टोप्स प्रजाति के डायनासोर का जीवाश्म मिला है।

पर्यावरणविद् डा. उमरअली सैफ ने आज इस बारे में जानकारी दी कि डायनासोर के नाक के सींग और आंशिक पंख मौजूद हैं। जिसकी लंबाई 46 सेंटीमीटर, मोटाई चार सेंटीमीटर और चौड़ाई नौ सेंटीमीटर से साढ़े पंद्रह सेंटीमीटर और अंतिम सिरे में आठ सेंटीमीटर है।
मई महीने में इसी का अंडा मिला था जिसकी लंबाई 19 सेंटीमीटर, चौड़ाई साढ़े सात सेंटीमीटर और आयतन 444 सेंटीमीटर और लंबाई एवं चौड़ाई का अनुपात ढाई सेंटीमीटर है। यह अंडा भारत में प्रचलित टाईटेनीसारिड मेगालूलियस अंडों से अलग करता है। प्राप्त जीवाश्म की लंबाई 330 मीटर और बीच में मोटाई 55 मिली मीटर है। इसका आकार दोधारी कटार जैसा है। जो ट्राईशेरा टोप्स के नाक जैसा है।
डा. उमरअली सैफ ने प्राप्त जीवाश्म के फोटो जांच के लिए जिवोलोजी सोसायटी आफ इंडिया को भेजे हैं। डा. उमरअली सैफ ने बताया कि इस जीवाश्म का मिलना बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि भारत में लेट क्रेरेटेसीयश काल यानि करीब 10 करोड़ वर्ष पूर्व से लेकर साढ़े छह करोड़ वर्ष पूर्व के डायनासोर के जीवाश्म बहुत ही कम संख्या में मिले हैं।
डा. सैफ के मुताबिक गुजरात के नर्मदा घाटी क्षेत्र में राजासोरस जैसे मांसाहारी डायनासोर के जीवाश्म पाए गए हैं। सींगधारी डायनासोर यानि ट्राइसेरा टोप्स उत्तरी अमेरिका में पाए जाते थे। सहारनपुर के शिवालिक क्षेत्र से इसके जीवाश्म मिलने से यह संभावना पैदा होती है कि प्राचीन समय में इस तरह का डायनासोर भारत में भी मौजूद था या वह किसी प्रजाति से विकसित हुआ होगा।

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