दुनिया मे मृत्यु का तीसरा सबसे बाद कारण सीओपीडी है : डॉक्टर मौर्य
मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉक्टर राकेश सिंह मौर्य ने मंगलवार को संवादताओ से कहा कि विश्व सीओपीडी हर साल 19 नवम्बर को मानयाजाता है | उन्होंने कहा कि जागरूकता के आभाव मे दुनिया भर मे मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) है|
डॉ मौर्य ने बताया कि सीओपीडी मनाने के पीछे सबसे बाद कारण है कि दुनिया भर मे इसके कारणों और लक्षणों के बारे मे लोगों को सिक्षित करना है| उन्होंने बताया कि इसके बारे मे लोगों को शिक्षित करना और इसके सुरुआती लक्षणों और रोकथाम के उपायों पर ध्यान केंद्रित करना है | इस बीमारी को बढ़ने से रोक तो जा सकता है लेकिन पूर्णरूप से ठीक नहीं किया जा सकता है |
उन्होंने ने बताया कि यह एक श्वसन रोग है जो फेफड़ों को धीरे धीरे नुकसान पहुचाता है| इसमें श्वसन नली की परत में लंबे समय तक सूजन और जलन होती है, जिससे बलगम का उत्पादन बढ़ जाता है। इसमें फेफड़ों की हवा की थैलियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे फेफड़ों की लोच कम हो जाती है और सांस लेने में कठिनाई होती है। जिससे व्यक्ति को सांस लेने मे कठिनाई होती है उन्होंने बताया कि समाज मे यह बीमारी 10 से 11 प्रतिशत देखा जाता है |
डॉक्टर मौर्य ने बताया कि सीओपीडी का प्रमुख कारण धूम्रपान है | उन्होंने बताया कि 80 फीसदी से अधिक मामले धूम्रपान के कारण होते है | सेकंड हैंड स्मोकिंग भी इसका एक कारण है | उन्होंने बताया कि तंबाकू के धुए से निकलने वाले पदार्थ श्वसन नली की दीवारों मे जलन और सूजन पैदा करते है | इसके अलावा निर्माण , खनन और कृषि सहित एसे व्यवसायों मे काम करने वाले कर्मचारी जो धूल , रसायनों, और धुएं के संपर्क मे आते है उनमें सीओपीडी पैदा होते है |
एक सवाल के जवाब मे उन्होंने बताया कि आनुवंशिकता जैसे कुछ कारकों को नियंत्रित नहीं किया जा सकता लेकिन जीवन शैली मे कुछ बदलाव करके इस बीमारी के विकाश को रोक जा सकता है जिससे फेफड़े के कार्यक्षमता मे सुधार करने मे मदद मिल सकती है

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