भारत की परंपरा संतों, ऋषि-मुनियों व महापुरुषों के त्याग-बलिदान की महागाथाः योगी

गाजियाबाद, 27 नवंबर ( वार्ता) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि भारत की परंपरा संतों, ऋषि-मुनियों व महापुरुषों के त्याग-बलिदान की महागाथा है। युगों-युगों से यह महागाथा विश्व मानवता के लिए प्रेरणा रही है। विश्व मानवता ने इस महागाथा का श्रवण व प्रेरणा प्राप्त कर भविष्य को तय किया है।

योगी ने कहा कि तीन दिन पूर्व अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण कार्य को पूर्ण करने के महायज्ञ की पूर्णाहुति कार्यक्रम के साथ ही पीएम मोदी के करकमलों से भव्य भगवा ध्वज का आरोहण संपन्न हुआ। पूरी दुनिया व देश ने भारत के इस सनातन वैभव को देखा और अनुभव किया।
योगी गुरुवार को तरुण सागरम् तीर्थ, मुरादनगर पहुंचे। उन्होंने यहां पंचकल्याणक महामहोत्सव के अंतर्गत 100 दिन में निर्मित गुफा मंदिर का उद्घाटन किया।
योगी आदित्यनाथ ने भगवान पार्श्वनाथ जी व संत तरुण सागर जी महाराज का स्मरण किया। सीएम ने मेरी बिटिया व अंतर्मना दिव्य मंगल पाठ पुस्तक का विमोचन भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी का सौभाग्य है कि अयोध्या में प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभ देव व चार जैन तीर्थंकर पैदा हुए। दुनिया ने काशी में चार जैन तीर्थंकरों को अवतरित होते हुए देखा है। श्रावस्ती में जैन तीर्थंकर भगवान संभवनाथ का जन्म हुआ। भगवान महावीर का महापरिनिर्वाण कुशीनगर के पावागढ़ में हुआ था। हमारी सरकार ने फाजिलनगर का नाम (जहां भगवान महावीर ने महापरिनिर्वाण हुआ था), उसके नामकरण की कार्रवाई को पावा नगरी के रूप में बढ़ाया है।
योगी ने कहा कि 24 जैन तीर्थंकरों ने समाज को नई दिशा और विश्व मानवता को करुणा, मैत्री, अहिंसा व ‘जियो-जीने दो’ की प्रेरणा दी। उन्होंने सिर्फ मनुष्य ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव-जंतु के लिए नई प्रेरणा प्रदान की, जिसकी प्रासंगिकता आज भी उसी रूप में बनी हुई है। मानव सभ्यता को विकास की नित नई ऊंचाइयों तक पहुंचना है तो उन्हें भारत के अध्यात्म की शरण में जाना होगा।
उन्होने कहा कि ऋषि-मुनि परंपरा ने जो संदेश दिया है, हम उसे आत्मसात करते हैं तो यह विश्व मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।

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