भारत कि सभ्यता नदियों से जुड़ी रही :न्यायमूर्ति मंजूरानी
झूसी स्थित गोविंद बल्लभ पंत संस्थान मे शनिवार को “ नंदी संवाद” कार्यक्रम मे लोगों को संबोधित करते हुए कहा भारत कि सभ्यता नदियों से जुड़ी रही है | गंगा, यमुना और सरस्वती जैसे नदिया हमारी संस्कृति कि पहचान रही हैं | लेकिन आधुनिकता के प्रभाव मे आज इंसान प्रकृति से दूर होता जा रहा है | उन्होंने कहा कि जैसे घर मे नारी का सम्मान जरूरी है वैसे ही प्रकृति मे नदियों का सम्मान और सरंक्षण भी आवश्यक है |
इस अवसर पर पर्यावरणविद डॉक्टर अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि विज्ञान और विकाश कि दौड़ मे सबसे अधिक क्षति जंगलों और नदियों का हुआ है | भारत मे की नदिया सुख रही है और प्रदूषण के कारण उनका स्वरूप बदल गया है |
पद्मश्री डॉ अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि नदियां केवल जल का प्रवाह नहींए, बल्कि समाज और प्रकृति के बीच संतुलन का माध्यम हैं। जब नदी सूखती है तो संस्कृति भी सूख जाती है। उन्होंने युवाओं से जल.जागरूकता और नदी संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा मां गंगा की अभियंता निर्मलता की प्रयागराज वीडियो की अधिक जिम्मेदारी है। क्योंकि यहां कुंभ का आयोजन होता है कुंभ में करोड़ों लोग डुबकी लगाने आते हैं। ऐसे में प्रयागराज वासियों की जिम्मेदारी अधिक बनती है। जिस प्रकार से जलवायु परिवर्तन का असर दिख रहा है ऐसे में अब पर्यावरण संरक्षण संवर्धन हेतु धरातल पर काम करने की आवश्यकता है।
डॉक्टर अनिल ने कहा कि नदी और वातावरण के प्रदूषण का असर अब हवा पर भी दिखलाई पड़ रहा है | देश कि राजधानी दिल्ली कि हवा जहरीली हो चुकी है और वह रहने वाली लोग शुद्ध सांस लेने के लिए तरस रहे है और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं। लोगों में प्रदूषण से हो रही बीमारियां जैसे आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, खांसी और खराब गले जैसे लक्षण सामने आए हैं|

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें