अरुण ग्रह (Uranus) की रहस्यमई दुनिया और इसके विरोध बिंदु (Opposition of Uranus) की सौगात

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला ( तारामण्डल) गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगर हम बात करें अरुण ग्रह की तो पाते हैं कि बाहरी सौर मंडल में विशाल गैसीय पिंडों वाले जो चार ग्रह हैं उनमें अरुण (यूरेनस) एक है। अन्य तीन बड़े ग्रह हैं-वृहस्पति, शनि व नेपच्यून। अरुण सौर मंडल का तीसरा बड़ा ग्रह है। विषुववृत्त पर अरुण ग्रह का व्यास 51,000 किलोमीटर है, जो शनि के व्यास के आधे से कुछ कम, किंतु पृथ्वी के व्यास से चार गुना है। यूरेनस का भार लगभग 15 पृथ्वियों के बराबर है, इसका औसत घनत्व 1.5 है। अरुण ग्रह सूर्य से 287 करोड़ किलोमीटर की औसत दूरी पर है। इसका अर्थ यह हुआ कि यह ग्रह हमारी पृथ्वी की अपेक्षा सूर्य से 19 गुना अधिक दूर है। यूरेनस लगभग 7 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से हमारे 84 वर्षों में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है। और यह शुक्र ग्रह की तरह अपने अक्ष पर पूरब से पश्चिम दिशा में चक्कर लगाता है लेकिन यह ग्रह सिर्फ 11 घंटों में अपनी धुरी पर एक चक्कर लगा लेता है। दूरबीन से इसका सिर्फ बाहरी वायुमंडल ही दिखाई देता है। यूरेनस का केंद्रीय भाग संभवतः ठोस चट्टान का है। इसका घना वायुमंडल प्रमुखतः हाइड्रोजन, हीलियम व मीथेन आदि गैसों से बना है, इसलिए यह कुछ हरे रंग का नजर आता है। यूरेनस तक बहुत कम सूर्य-ताप पहुंचता है, या यूं कहें कि अरुण ग्रह तक जाते जाते सूर्य की किरणें भी थक सी जाती हैं, इसलिए इसके वायुमंडल का तापमान शून्य के भी 200° सेंटीग्रेड नीचे ही रहता है। और अरुण ग्रह के चारों ओर अब तक ज्ञात 13 बहुत धुंधले छल्ले भी पाये जाते हैं। एवं अरुण ग्रह के कुल ज्ञात उपग्रहों की संख्या वर्तमान में 29 हैं। 


क्या होता है अरुण ग्रह का विरोध बिंदु।?

(“Opposition of Uranus”) का मतलब है ।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जब पृथ्वी, सूर्य और अरुण ग्रह (यूरेनस) एक सीधी रेखा में आ जाते हैं, और अरुण ग्रह पृथ्वी के ठीक विपरीत दिशा में सूर्य के सामने दिखाई देता है, तो इस स्थिति को विरोध (Opposition) कहा जाता है। और यह घटित होगा इस बार यूरेनस का विरोध-बिंदु 21 नवंबर, 2025 की रात को है। 

क्यों कहा जाता है इस ग्रह को लेटा हुआ ग्रह। ?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 

“लेटा हुआ ग्रह” 

अरुण ग्रह को लेटा हुआ ग्रह भी कहा जाता है । इसका कारण है  इसका ख़ुद का 98° का धुरीय झुकाव, यूरेनस की घूर्णन धुरी लगभग 98 डिग्री झुकी हुई है।

इसका मतलब हुआ कि यह ग्रह लगभग अक्ष पर नहीं, बल्कि बगल करवट लेट कर सूर्य की परिक्रमा करता है। इसलिए इसे अक्सर “लेटा हुआ ग्रह” कहा जाता है। और यही कारण है कि यह सौर मंडल में सबसे अधिक झुकी हुई धुरी वाला ग्रह है ।इसका प्रभाव है कि इसके ध्रुव (Poles) लंबे समय तक सूर्य की ओर या सूर्य से दूर रहते हैं। और यहां हर ऋतु (season) लगभग 21-21 वर्ष चलती है। जैसा कि हम जानते हैं कि प्रकाश की गति तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकेंड होती है इसी गति से चलते हुए अरुण ग्रह का प्रकाश हम तक पहुंचने में लगभग तीन घंटे का समय लगता है, वास्तव में दूसरे ग्रहों की तुलना में अरुण ग्रह एक अद्भुत ग्रह है। इस ग्रह की भूमि पर सूर्य पश्चिम दिशा में उदित होकर पूर्व दिशा में अस्त होता है। इतना ही नहीं, इसके सभी चन्द्रमा पश्चिम दिशा में उदित होकर पूर्व दिशा में अस्त होते हैं। है न कमाल का ग्रह।

इस दौरान आकाश में अरुण ग्रह कहाँ और कैसे दिखाई देगा।? 

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अरुण (यूरेनस) की चमक बहुत अधिक नहीं होती है, लेकिन विरोध बिंदु के समय इसका मैग्निट्यूड लगभग +5.6 होगा, 

क्या मतलब होता है +5.6 मैग्नीट्यूड का। ?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि मैग्नीट्यूड स्केल में बड़ी संख्या का मतलब होता है कम चमक।  +5.6 एक-दम धुंधली/कम चमक वाला मान है एवम् यह सैद्धान्तिक रूप से अत्यंत अँधेरे आसमान में पूरी तरह से प्रकाश प्रदूषण रहित होने पर भी नग्न आँख से दिखाई देना उतना आसान नहीं है, इसीलिए सामान्य शहर-आसपास जगहों या ग्रामीण क्षेत्रों में भी बाइनॉक्यूलर/दूरबीन की ही जरूरत पड़ेगी। जो सामान्य अँधेरे आकाश में बहुत सक्षम दूरदर्शी (टेलीस्कोप) या अच्छे बायनॉक्यूलर से ही देखा जा सकता है, इसीलिए नग्न आँख से आसानी से दिखाई नहीं देता है। 

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सबसे पहले अरुण ग्रह को इंग्लैंड के एक शौकिया खगोलविद विलियम हर्शेल  (1738-1822 ई.) ने दूरबीन से 13 मार्च, 1781 को सौर मण्डल में एक नए ग्रह की संयोगवश खोज की, तो सभी चकित रह गए। और इसी ग्रह को नाम दिया गया था यूरेनस या अरुण ग्रह जो बना हमारे सौर मण्डल का सातवां प्रमुख ग्रह।

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला ( तारामण्डल) गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगर आपको भी अरुण ग्रह को देखना है तो सटीक जानकारियों और कुछ विशेष सावधानियों के साथ आप भी इसको अपनी दूरबीन से देख सकते हैं जैसे कि इस विरोध बिंदु के दौरान अरुण ग्रह वृषभ नक्षत्र में होगा एवं यह प्लीएड्स या कृत्तिका नक्षत्र क्लस्टर के लगभग 4 से 4.5° दक्षिण में दिखाई देगा। और दिन के अंत में (सूर्यास्त के बाद) यह पूर्व-दक्षिण पूर्व दिशा से उदय होते हुए दिखाई देगा। और मध्य रात्रि (लेकिन कम रोशनी वाले समय) में यह सबसे ऊँचा होगा, और दक्षिण दिशा में दिखाई देगा। और सुबह के करीब (उदय के समय) यह पश्चिम-दक्षिण पश्चिम की दिशा की ओर अस्त होगा, इस कारण इसे पूरी रातभर किसी दूरबीन की सहायता से ही देखा जा सकता है। खगोलविद ने अतिरिक्त सुझाव देते हुए कहा कि यूरेनस को प्लीएड्स क्लस्टर (M45) के पास देखना आसान रहेगा क्योंकि वह करीब 4° के दायरे में नीचे (दक्षिण) में होगा। एवं एक मुख्य बात यह भी है कि तारों को पहचानने के क्रम में अल्डेबेरन या रोहिणी तारा, वृषभ नक्षत्र का सबसे चमकीला तारा है इसीलिए भारतीय खगोल परंपरा में रोहिणी एक प्रमुख एवं प्रसिद्ध तारा है। साथ ही अरुण ग्रह , रोहिणी तारा (अल्डेबेरन) और कृत्तिका नक्षत्र (प्लीएड्स) के आस पास में ही होगा जिस से इसे पहचानने में और भी सहूलियत होगी।

कौन सा होगा, देखने का सर्वोच्च समय। ?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अरुण ग्रह के विरोध की रात अरुण ग्रह पूरी रातभर दिखाई देगा। लेकिन सबसे अच्छा समय: मध्य रात्रि के आसपास, जब यह आकाश में सबसे ऊँचा होगा। इस दौरान अरुण ग्रह अपने चरम पर होगा इस दौरान प्रकाश प्रदूषण नहीं होने एवं स्वच्छ एवम् साफ आसमान होने पर ही आप किसी विशेष दूरबीन या विनोकुलर आदि से ही इसका दीदार कर सकते हैं। 


जय हिंद। 

किसी विशेष खगोलीय जानकारी हेतु संपर्क करें।

© खगोलविद अमर पाल सिंह, (एजुकेटर खगोल विज्ञान) ,वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत।

amarpal2250@gmail.com 

संपर्क सूत्र _7355546489,

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सपा अध्यक्ष को लगता है कि मुसलमान उनकी जेब में हैं: मायावती

हार-जीत से बड़ा है सक्षम बनना

24 जुलाई 2026 को चंद्रमा दिखाई देगा अन्टारेस (ज्येष्ठा नक्षत्र के योगतारा) के पास