काशी तमिल संगमम् के 10वें दिन हनुमान घाट पर पेशेवरों और कारीगरों के समूह ने किया स्नान, सुब्रमण्यम भारती के घर पहुंचकर जाना इतिहास
(PIB Lucknow) काशी तमिल संगमम् 4.0 में तमिलनाडु से आया पेशेवरों और कारीगरों का समूह गुरुवार को हनुमान घाट पहुंचा। जहां सभी ने गंगा में स्नान कर मां का पूजा पाठ करते हुए सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। गंगा स्नान के बाद समूह ने घाट पर स्थित प्राचीन मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। सभी लोगों को मंदिरों के इतिहास दिव्यता,भव्यता और इतिहास के बारे में जानकारी दी गई।

इसके उपरांत तमिल डेलीगेट हनुमान घाट स्थित सुब्रमण्यम भारती के घर गए। वहां उनके परिवार के सदस्यों से उन्होंने मुलाकात की। समूह के लोगों में काफी कुछ जानने की जिज्ञासा दिखी उन्होंने सुब्रमण्यम भारती के घर के समीप पुस्तकालय का भी भ्रमण किया और काफी कुछ वहां के बारे में जानकारी भी प्राप्त की। महाकवि सुब्रमण्यम भारती तमिल साहित्य और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक चमकते हुए सितारे के रूप में जाने जाते हैं। उन्हें तमिल का राष्ट्रकवि भी कहा जाता है। काशी में अपने प्रवास दौरान महाकवि भरतियार ने संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी का गहन अध्ययन किया।
सुब्रमण्यम भारतीय के घर पर भ्रमण करने के उपरांत यह समूह कांची मठ पहुंचा और वहां के इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त की काशी में दक्षिण भारतीय मंदिर को देखकर पेशेवरों और कारीगरों का दल उत्साहित दिखा।

तमिल समूह को काशी का इतिहास समझाने वाले वाले वी. चंद्रशेखर द्रविड़ घनपाठी बताते हैं कि केदार घाट और हनुमान घाट ऐसे मोहल्ले हैं, जहां दक्षिण भारत के लोग कई पीढ़ियों से रहते हैं। अब वह सभी काशीवासी हो चुके हैं। कोई यहां 5 पीढ़ियों से रहता है, तो कोई 10 पीढ़ियों से यहां रह रहा है। यह सभी यहां की परंपरा को आत्मसात कर रहे हैं और अपनी परंपराओं के साथ आगे बढ़ रहे हैं। एक तरीके से कहें तो महादेव की काशी में उत्तर भारत और दक्षिण भारत की साझा संस्कृति यहां विकसित हो चुकी है। पेशेवरों और कारीगरों का यह समूह काशी में कई अन्य कार्यक्रमों में शामिल होते हुए नमो घाट पहुंचेगा।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें