'भारत-अमेरिका परमाणु सहयोग को 'शांति अधिनियम 2025' देगा बढ़ावा'
नयी दिल्ली, 23 दिसंबर (वार्ता) अमेरिका-भारतीय रणनीतिक सहभागिता पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) ने मंगलवार को -नाभिकीय ऊर्जा का सतत दोहन तथा उन्नयन विधेयक 2025 के पारित होने का स्वागत करते हुए इसे भारत के नागरिक परमाणु ढांचे में 'व्यापक सुधार' बताया, जो स्वच्छ ऊर्जा में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करेगा।
लोकसभा और राज्यसभा दोनों से पारित होने के बाद इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली है। आजादी के बाद से भारत के परमाणु क्षेत्र में यह सबसे बड़ा सुधार है। यह नया कानून परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 और सिविल लायबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज अधिनियम 2010 का स्थान लेगा।यूएसआईएसपीएफ ने इस अधिनियम को भारत के ऊर्जा परिदृश्य में 'ऐतिहासिक मोड़' करार दिया है, जो अमेरिका और भारत के बीच परमाणु ऊर्जा विकास में बेहतर सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा।
शांति अधिनियम भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी और विदेशी भागीदारी बढ़ाने, परमाणु ऑपरेटरों के लिये दायित्व ढांचे को स्पष्ट करने और 2008 में किये गये भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते की लंबित संभावनाओं को क्रियान्वित करने की क्षमता के मद्देनजर इसमें महत्वपूर्ण संशोधन किये गये हैं।
यूएसआईपीएफ ने एक बयान में कहा, "यह सुधार भारत के परमाणु ऊर्जा बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और स्वच्छ ऊर्जा विकास में द्विपक्षीय सहयोग मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।"
फोरम ने इस बात पर भी जोर दिया कि यह अधिनियम अमेरिका-भारत नागरिक परमाणु समझौते की संभावनाओं का उपयोग करता है और टिकाऊ तथा उन्नत परमाणु ऊर्जा के बदलाव का समर्थन करता है, जो दोनों देशों के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों का अहम हिस्सा है।
उम्मीद है कि अधिनियम भारत के परमाणु क्षेत्र में विदेशी निवेश और प्रौद्योगिकी स्थानांतरण को आकर्षित करेगा, जो नियामक प्रतिबंधों और दायित्व की चिंताओं के कारण निजी भागीदारी बढ़ाने में चुनौती रही हैं।

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