उत्तर प्रदेश भाजपा में बड़ा बदलाव जल्द, नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा 2–3 दिन में संभव

लखनऊ, 11 दिसंबर (वार्ता) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई में संगठनात्मक बदलाव की तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश चुनाव प्रभारी पीयूष गोयल आज शाम तक लखनऊ पहुंचेंगे। पार्टी के वरिष्ठ नेता हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करेंगे। उनकी यह यात्रा प्रदेश में नए संगठनात्मक नेतृत्व के चयन से जोड़कर देखी जा रही है।
पार्टी सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि पार्टी इस बार प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के नेता पर भरोसा जता सकती है। इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान अगले दो से तीन दिनों के भीतर निर्वाचन प्रक्रिया के तहत हो सकता है।
पीयूष गोयल को यूपी चुनाव प्रभारी बनाए जाने के बाद संगठन में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। उनके नेतृत्व में चुनाव प्रबंधन, संगठन विस्तार, उम्मीदवार चयन और जनसंपर्क अभियानों को गति देने की योजना है। भाजपा सूत्रों के अनुसार, गोयल प्रदेश के सभी संगठनात्मक स्तरों पर जाकर तैयारियों का जायजा लेंगे और नए अध्यक्ष के औपचारिक एलान को अंतिम रूप देंगे।
भाजपा ने हाल ही में प्रांतीय परिषद के सदस्यों की घोषणा की है, जिसे व्यापक संगठनात्मक फेरबदल का संकेत माना जा रहा है। पार्टी का मानना है कि नई टीम के साथ चुनावी तैयारियों को मजबूती मिलेगी और प्रदेश भर में संगठन अधिक सक्रिय होगा।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष बदलना भाजपा की पुरानी रणनीति का हिस्सा रहा है, जिससे संगठनात्मक ढांचे में ताजगी बनी रहती है। इस बार भी यह फैसला चुनावी रणनीति को धार देने के उद्देश्य से लिया जा रहा है। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि, “ पीयूष गोयल का लखनऊ आना कई मायनों में महत्वपूर्ण है। नए प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान किया जा सकता है। हालाकि इस दौरान गोयल की प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह के बीच अहम बैठक भी होगी।”
पार्टी सूत्रों के मुताबिक़, भाजपा ऐसा चेहरा चुनने में सावधानी बरत रही है जो संगठन और सरकार के बीच संतुलन साधते हुए 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए मजबूत तैयारी सुनिश्चित कर सके, जहां पार्टी का सामना आक्रामक समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगी कांग्रेस से होगा। 2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सीटें 62 से घटकर 33 होने के बाद संगठन बनाम सरकार की कथित खींचतान और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का “संगठन सरकार से ऊपर” वाला बयान सुर्खियों में रहा था।
पार्टी का आकलन है कि संगठन और सरकार के बीच किसी भी तरह की दूरी ‘कार्यकर्ताओं की अनदेखी’ जैसे नैरेटिव को हवा देने का मौका दे सकती है।

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